Rajasthan sthapna Diwas : राजस्थान जिसे वीरों की धरती कहा जाता है। क्षेत्रफल की दृष्टि से इसे भारत का सबसे बड़ा राज्य भी कहा जाता है। आजादी से पहले राजस्थान को राजपूताना नाम से जाना जाता था। राजस्थान का भारत के नक्शे पर एक विशेष पहचान है। अपनी परंपरा,धरोहर और खान-पान के लिए मशहूर राजस्थान का जन्म 30 मार्च 1949 को हुआ। हर साल इस दिन को यानी कि 30 मार्च को राजस्थान के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। राजस्थान को प्राचीन समय से ही भारत का सबसे सुंदर राज्य माना जाता है। राजस्थान की 76 वीं वर्षगांठ के मौके पर आइए जानते हैं कि राजस्थान अस्तित्व में कैसे आया?

राजस्थान का इतिहास

3 जून 1947 आजादी के समय भारत के विभाजन की घोषणा हुई थी। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आठवीं अनुच्छेद में यह प्रावधान था कि देशी रियासतें आजादी के बाद भारत या पाकिस्तान में अपना विलय कर सकती है। आजादी के समय राजस्थान में तीन ठिकाना और 19 रियासतें हुआ करती थी। यहां के शासकों को ये तय करना था अपने रियासत का भारत में विलय करे या पाकिस्तान।

76 साल पहले रियासतों से मिलकर ऐसे बना राजस्थान 

राजस्थान की एकीकरण सात चरणों में हुआ। आजादी के समय यहां पर अनेकों रियासत थी जिसे मिलकर एक राज्य बनाया गया यानी राजस्थान। रियासतों को मिलाने का काम 18 अप्रैल 1948 से शुरू हुआ धौलपुर,अलवर,करौली और भरतपुर और रियासतों के विलय से हुई। कई चरणों में में रियासत आपस में जुड़ी। अंत में 30 मार्च 1949 के दिन जैसलमेर,बीकानेर,जयपुर और जोधपुर रियासतों के विलय से राजस्थान अस्तित्व में आया। इन रियासतों के एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

राजस्थान दिवस के मौके पर सरदार वल्लभभाई पटेल का भाषण 

राजस्थान दिवस के उद्घाटन के मौके पर कालीन गृह मंत्री सरदार भाई पटेल ने अपने भाषण में कहा कि राजपूताना की आज से एक नए वर्ष की शुरुआत है। इस नए वर्ष पर आज के दिन राजस्थान के महत्व को पूर्ण रीति से समझना चाहिए। ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि हमें एक योग राजस्थानी बनाएं।

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