Rajasthan Energy Sector News: राजस्थान के लोगों को महंगी बिजली से राहत मिलने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। जिसमें राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) के 2016 के बिजली विनियमों को पूरी तरह वैध ठहराकर, बिजली कंपनियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश के लोगों को सस्ती बिजली मिलने की संभावनाएं पुख्ता हो गईं हैं।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि कोई भी प्रदेश सरकार बिजली के उपयोग पर अपने अधिकार क्षेत्र तक ही नियंत्रण रख सकती हैं। हालांकि अंतर राज्य विद्युत व्यापार केंद्र सरकार के है अधीन रहेगा। कोर्ट का यह फैसला विद्युत अधिनियम, 2003 की व्याख्या का पूरी तरह बखान करता है।
राजस्थान सरकार और RERC की तरफ से शिव मंगल शर्मा (अतिरिक्त महाधिवक्ता) सुप्रीम कोर्ट ने पेश हुए थे। उन्होंने कहा कि 17 अक्टूबर को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। साथ ही यह ऐतिहासिक निर्णय 1 अप्रैल 2025 को सुनाया गया है। जिससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
पूरा मामला क्या था
सुप्रीम कोर्ट में याचिका रामायण प्रा. लि. और हिंदुस्तान जिंक लि. जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा दाखिल की गई थी। जिसमें प्रदेश के 2016 के विनियमों को चुनौतियां दी गई थी। कंपनियों का कहना था कि ये विनियम उनके अपने पॉवर प्लांट या अन्य राज्यों से बिजली खरीद के अधिकारों को सीमित कर रहे हैं। "ओपन एक्सेस" (जिसमें बड़े उपभोक्ता अपनी पसंद की बिजली कंपनी को चुन सकते हैं) के प्रयोग से काम महंगा और मुश्किल हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
याचिकाओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट कहती है कि RERC के नियम पूरी तरह कानूनी हैं और सभी नियम राज्यों के अंदर बिजली प्रबंधन की व्यवस्था को बनाए रखते हैं। साथ ही कोर्ट कहती है कि कैप्टिव पॉवर प्लांट पर लगाया गया जुर्माना भेदभावपूर्ण नहीं है। ओर तो ओर यह सभी उपभोक्ताओं पर भी लागू होता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं को नियमों के तहत नियंत्रित होती हैं और इससे किसी मौलिक अधिकार का हनन नहीं होता।
किसे किसे होगा फायदा
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रदेश सरकार को विद्युत क्षेत्र को अपने तरीके से प्रभावी रखने और नियंत्रित करने का अधिकार मिल गया है। प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली आपूर्ति मिलेगी। इस निर्णय से औद्योगिक क्षेत्र को भी लाभ हुआ है। सब अनिश्चितताएं खत्म हो गई हैं।
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