Rajsthan News: सूचना का अधिकार एक महत्वपूर्ण कानून है जिससे कई भ्रष्टाचार उजागर हुए हैं। आरटीआई लगाकर किसी भी विभाग की कोई भी जानकारी ली जा सकती है। कई बार लोग या विभाग आरटीआई का जवाब 30 दिन के अंदर नहीं देते जिसके कारण उन पर जुर्माना लगाया जाता है। राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार कानून (RTI) के तहत जानकारी नहीं देने पर नगर निगम ग्रेटर स्टेट पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (गौशाला) पर 2500 रुपये का जुर्माना लगाया है। सूचना आयुक्त सुरेश चंद गुप्ता ने इसके आदेश दिए हैं।
डेढ़ साल से नहीं दिया गया जवाब
बरजंग सिंह शेखावत नामक वकील ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर ऑनलाइन पोर्टल पर नियम विरुद्ध पालतू पशुओं को घर पर रखने के संबंध में शिकायत दर्ज की थी। उन्होंने इस शिकायत के संबंध में हुई कार्रवाई की सूचना मांगी थी।
एडवोकेट ने आरटीआई अधिनियम के तहत 07 सितंबर 2023 को आवेदन किया था, लेकिन करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी उन्हें सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। उसके बाद परिवादी ने सूचना के अधिकार क़ानून के तहत प्रथम अपील दायर की थी लेकिन उसके बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
राज्य सूचना आयोग के आदेश का भी नहीं किया पालन
हद तो तब हो गई जब परिवादी ने द्वितीय अपील दायर की और राज्य सूचना आयोग उस पर सुनवाई करते हुए 7 जून 2024 को गौशाला उपायुक्त को सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दिया। लेकिन इसके बाद भी परिवादी को कोई जानकारी नहीं उपलब्ध कराई गई तब फिर परिवादी ने फिर से राज्य सूचना आयोग में परिवाद दायर किया। जिस पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने निगम उपायुक्त को नोटिस जारी कर 15 दिन में व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। लेकिन इस बार भी वही हुआ जो बार होता आ रहा है। न तो उन्होंने कोई स्पष्टीकरण दिया न ख़ुद उपलब्ध हुए।
दोषी मानकर महत 2500 रूपए का लगाया जुर्माना
इसके बाद निगम उपायुक्त पर जानबूझकर जानकारी न देने के लिए दोषी करार दिया गया और उन पर ढाई हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह जुर्माना उनके वेतन से काटकर 30 दिन के अंदर आयोग में जमा कराया जाएगा। आदेश की प्रति लेखा शाखा एवं आयुक्त, नगर निगम ग्रेटर जयपुर को प्रेषित की गई।