Rajasthan Hunter Birds: शिकारी पक्षियों के मामले में राजस्थान भारत ही नहीं, एशिया में टॉप पर जा पहुंचा है। राजस्थान में कई ऐसे स्थान हैं, जहां शिकारी पक्षियों की घनी आबादी है। खासकर राजस्थान के बाड़मेर, कोटा, जैसलमेर, धौलपुर और झालावाड़ के संभागों में शिकारी पक्षियों की संख्या बहुत अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में वन संरक्षण और बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन के नजरिए से देखा जाए तो यह राजस्थान के लिए गौरव का विषय है।

आईयूसीएन ने करवाया गणना 

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने शिकारी पक्षियों की प्रजातियां का शीतकालीन जनगणना किया है। आईयूसीएनके के सदस्य डॉक्टर दाऊलाल बोहरा ने इस जनगणना की रिपोर्ट के बारे में बात करते हुए बताया कि शीतकालीन प्रवास जनगणना के अनुसार राजस्थान के केरू में 9456 और जोड़बीड़ में 6640 शिकारी पक्षी पाए गए हैं। जो कि जैवविविधता के संरक्षण के लिए बहुत ही अच्छे संकेत है। शीतकाल में हर साल मध्य एशिया से बहुत से प्रवासी शिकारी पक्षी राजस्थान पहुंचते हैं, क्योंकि इस इलाके में उन्हें भरपूर खाना उपलब्ध होता है। 

क्यों है आवश्यक? 

शिकारी पक्षियों में मुख्यतः गिद्ध, बाज और चील के अतिरिक्त 500 से भी अधिक रैपटर की प्रजातियां होती हैं, जो मुख्यतः वातावरण की अशुद्धियों को साफ करने का काम करते हैं। दरअसल यह शिकारी पक्षी मरे हुए जीवों को खाकर अपना भोजन प्राप्त करते हैं। इससे वातावरण साफ होता है और कई तरह की बीमारियों के फैलने का खतरा कम हो जाता है। इन शिकारी पक्षियों के इसी महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने निमेसुलाइड युक्त दवाई पर प्रतिबंध लगा दिया है। क्योंकि यह जानवरों के शरीर पर तो दर्द निवारक दवा के रूप में काम करता है लेकिन, जो शिकारी पक्षी इन जानवरों के अवशेष को खाते हैं उनकी मृत्यु हो जाती है।

जोधपुर और बीकानेर टॉप पर 

आईयूसीएन की इस जनगणना के अनुसार राजस्थान के जोधपुर जिले का केरू डंपिंग यार्ड और बीकानेर का जोड़बीड़ कंजर्वेशन रिजर्व सेंटर शिकारी पक्षियों का मुख्य अड्डा है। यहां शिकारी पक्षियों को भरपूर रूप से खाना प्राप्त होता है, यहीं वजह है कि एशिया में सबसे अधिक शिकारी पक्षियों की तादाद यहां पाई जाती है। आईयूसीएन के सदस्य डॉक्टर बोहराने निमेसूलाइड की बिक्री के ऊपर बात करते हुए बताया कि केंद्र सरकार के द्वारा निमेसूलाइड के सभी तरह के उत्पादों के उत्पादन बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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