Tejaji Maharaj Story: जयपुर के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक वीर तेजाजी मंदिर की प्रतिमा तोड़ने की घटना के बाद जयपुर सहित पूरे राजस्थान में आक्रोश का माहौल है। जिसके बाद हजारों लोग सड़कों पर उतरे और नारेबाजी कर विरोध जताया। कई लोगों ने मंदिर के आस-पास रखी गाड़ियों के टायरों में भी आग लगा दी। बता दें कि शुक्रवार देर रात कुछ असामाजिक तत्वों की ओर से मूर्ति को खंडित किया गया था। इसकी खबर मिलने के बाद शनिवार सुबह लाखों लोगों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर विरोध जताया। इस घटना ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं ये तेजाजी कौन हैं इनकी क्या महिमा है?

कौन है तेजाजी महाराज?
तेजाजी महाराज जिन्हें वीर तेजाजी के नाम से भी जाना जाता है। ये राजस्थान के एक प्रसिद्ध लोक देवता है। तेजाजी का जन्म 29 जनवरी 1074 को राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में हुआ था। वे धोलिया जाट वंश से संबंधित थे उनके पिता ताहरदेव यानी ताहर जी खरनाल के मुखिया थे और माता का नाम रामकुंवरी था।

पेमल से हुआ था विवाह
तेजाजी का विवाह पेमल नामक युवती से हुआ था, जो पनेर गांव के रायमल की पुत्री थी। तेजाजी को मुख्य रूप से उनके साहस सत्य निष्ठा और गौ रक्षा के लिए बलिदान के कारण याद किया जाता है। पेमल ने तेजाजी के मरणोपरांत सती होने का फैसला किया था।

शिव के 11वें अवतार माने जाते हैं तेजाजी
लोक मान्यताओं के अनुसार वे भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाते हैं। विशेष रूप से जाट समुदाय के बीच उनके प्रति गहरी श्रद्धा है हालांकि उनकी पूजा सभी वर्गों में प्रचलित है। तेजाजी को नागों का देवता कहा जाता है लोग मानते हैं कि सर्पदंश होने पर उनके मंदिर में जाकर प्रार्थना करने या उनके नाम की ती बांधने से जहर का असर खत्म हो जाता है। गायों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने के कारण उन्हें गौ रक्षक के रूप में भी पूजा जाता है।

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कब मनाई जाती है तेजा दशमी?
हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को तेजा दशमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन उनके मंदिरों में मेले लगते हैं खासकर खरनाल और पर्वतसर में जहां लाखों श्रद्धालु जुटते हैं लोग नारियल चढ़ाते हैं और उनकी गाथाएं गाते हैं जो कि आज भी राजस्थान की संस्कृति का हिस्सा है।