Chaitra Navratri 2025: अपने देश भारत में कई अजीबोगरीब स्थान है जहां के चमत्कारों पर विश्वास करना मुश्किल होता है। ऐसा ही एक अनोखा और चमत्कारी स्थान है राजस्थान के पाली में, जिसके बारे में जानकारी खुद वैज्ञानिक भी हैरान है। भाटून्द गांव में स्थित शीतला माता मंदिर में अनोखा चमत्कार दिखता है। जिसे देखने के लिए दूर - दूर से लोग देखने आते हैं खासतौर पर नवरात्रि के दिनों लोगों की भीड़ बढ़ जाती है। 

मंदिर में बना है अनोखी ओखली
मां शीतला मंदिर में एक 1 फीट गहरी और 6 इंच चौड़ी ओखली(घडा) है। इस ओखली में इलाके की सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश लेकर पानी डालती हैं फिर भी उसकी प्यास नहीं बुझती। यानी इसमें कितना भी पानी डालो लेकिन वह नहीं भरता। मंदिर के पुजारी पूजा अर्चना कर पंचामृत की बूंदे डालते हैं और ओखली का पानी बाहर आने लगता है। इस ओखली को साल में दो बार खोला जाता है पहली बार शीतला सप्तमी को और दूसरी बार जेष्ठ महीने की पूर्णिमा को।

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क्या है इसके पीछे की मान्यता?
इस रहस्य के पीछे ग्रामीण पौराणिक कथा के अनुसार गांव में किसी भी घर में शादी होती थी तो बाबरा नामक राक्षस था जो दूल्हे को मार देता था। इससे परेशान होकर गांव वालों ने शीतला माता की तपस्या की तो शीतला माता सपने में आकर बोली कि अबकी बार मैं आऊंगी तब शादी कराना। तब ग्रामीणों की पीड़ा पर शीतला माता ने राक्षस को इस जमीन पर पटक दिया। उसके बाद माता ने राक्षस से उसकी अंतिम इच्छा पूछा। इस पर राक्षस ने साल में दो बार बलि और पीने के लिए मदिरा की बात कही, जिसे मानने से गांव के ब्राह्मणों ने इंकार कर दिया। राक्षस को बलि के रूप में सूखा आटा गुड़ दही का भोग दिया जाता है, मदिरा की जगह पर राक्षस को पानी पिलाया जाता है। मान्यता है कि यह वो ओखली है जिसमें डाला गया पानी राक्षस को मिलता है। मान्यता है कि मंदिर में आने वाला कभी निराश नहीं लौटता।