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Jaipur Art Week: कार्यक्रम सांस्कृतिक और प्रकृति को समझने के लक्ष्य को दिखाता है। कार्यशाला से लोगों को विलुप्त हो रही प्राकृतिक सामग्रियों का भी पता चला। आज के समय में हमें विलुप्त हो रही इन सामग्रियों के महत्व को समझना होगा।

Jaipur Art Week: राजस्थान का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही पुराना यहां का खान पान और परंपराएं हैं। प्रदेश की खाद्य और परंपराओं को विलुप्त होते स्वाद को जानने-पहचानने तथा बचाने के लिए जयपुर के किशन बाग सैंड ड्यूस पार्क में एक बड़ी वर्कशॉप का आयोजन हो रहा है। जिसका नाम 'द काइंडनेस मील' रखा गया। राजधानी का यह आर्ट वीक प्रदेश की संस्कृति और प्रकृति के प्रेमियों के लिए बहुत खास रहा। 

आर्ट वीक में लोगों को कहानियों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से पुराने अनाजों, पौधों और पारंपरिक स्वादों को जानने का मौका मिला। प्रोग्राम का लक्ष्य लोगों को विलुप्त हो रही सामग्रियों के पारिस्थितिकी महत्व को बताना था। साथ लोगों को जैव विविधता के लिए जागरूकता प्रदान करनी थी। कार्यक्रम में लोगों को पुरानी संस्कृतियां देखने और जानने को मिली। साथ ही स्थानीय खाद्य वस्तुएं, पुराना अनाज, देसी पेड़ पौधों और पारंपरिक व्यंजनों को जानने का मौका मिला। कार्यशाला में लोगों को संरक्षित करने की भी प्रेरणा मिली। 

प्रदेश की विलुप्त होती खाद्य सामग्री

दीपाली (खाद्य शोधकर्ता) ने बताया कि प्रदेश का पुराना अनाज केवल पोषण के लिए ही नहीं, बल्कि प्रदेश के पारिस्थितिकी संतुलन के लिए भी आवश्यक है। आज के दौर में इनका प्रयोग कम होता जा रहा है। इसलिए आज नई पीढ़ी को पुराने अनाज के महत्व को समझाने और पारंपरिक व्यंजनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। जो भी यह अनाज विलुप्त होते जा रहे हैं, ये सब हमारी सांस्कृतिक विरासत है और इनकी रक्षा करना हमारा फ़र्ज़ है।

खाद्य वस्तुएं और प्रकृति 

मेनाल (किशन बाग की वरिष्ठ प्राकृतिमित्र) बताती हैं कि आज हमें पेड़ पौधों और पुराने अनाजों के अलावा पारिस्थितिकी और जैव विविधता को भी समझना होगा। इसलिए आर्ट वीक में लोगों को प्राचीन खाद्य वस्तुएं और प्रकृति के बीच के संबंध के बारे में बताया गया है। 

प्राचीन संस्कृति और प्रकृति का संबंध

आर्ट वीक में प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों के अलावा विलुप्त होने वाली सामग्रियों पर भी बात की गई है। इन पुरानी सामग्रियों को स्वाद के साथ साथ ऐतिहासिक रूप से भी समझाया गया है। कार्यक्रम में आए लोगों का कहना है कि कार्यशाला अनुभव के साथ एक संदेश भी देती है।

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