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Alwar makar Sankranti: मकर संक्रांति मनाने का कारण यह है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे लगभग हर हिस्सों में इस दिन पंतगे उड़कर इसे मनाया जाता है, लेकिन राजस्थान का एक ऐसा जिला जहां मकर संक्रांति को मनाने का एक अलग तरीका है।

Alwar makar Sankranti : राजस्थान में मकर संक्रांति हर जगह अपनी परंपराओ के आधार पर मनी जाती है, लेकिन परंपरा अलग होने के कारण भी लगभग हर जगह पतंगबाजी की खेल जरूर होता है। इस दिन जयपुर और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में पतंगबाजी की पूरे जोश से मनाई जाती है, लेकिन अलवर एक ऐसा जिला है, जिसमें पतंगो की जगह क्रिकेट, राउंडल, पिट्ठू सहित कांच की बॉल से खेला जाता है।

मकर संक्रांति पर पित्रो का भोग

राजस्थान में मकर संक्रांति के दिन अधिकतर गुड़-तिल के लड्डू और दाल बाटी चूरमा बनाए जाते हैं। राजस्थान के ज्यादातर हिस्सों में मकर संक्रांति के मौके पर पतंगबाजी होती है, लेकिन अलवर में इस दिन क्रिकेट, राउंडल, पिट्ठू सहित कांच की बॉल से खेलने वाले खेल खेलते हैं। अलवर में ये मान्यता है कि इस दिन अपने पित्रो को दाल बाटी का भोग लगाने से उनकी कृपा बनी रहती है, उसके बाद अपने करीबी लोगों को भोजन का निमंत्रण दिया जाता है। 

अलवर में मकर संक्राति का खेल

जहां एक तरफ आसमान पतंगो से भरा रहता है वही अलवर में क्रिकेट, राउंडल, पिट्ठू व कांच की बॉल से इस त्यौहार को मनाया जाता हैं। जिसमें सुबह से ही मैदानों में बच्चे खेलते हुए दिखाई देते हैं। इन खेलो के लिए गांवो में प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है, जिसमें लोगो द्वारा जोरों-शोरों से हिस्सा लिया जाता हैं।

अलवर की मनाने की परंपरा 

अलवर में इस दिन मां के द्वारा शादीशुदा बेटी के घर उपहार लेकर जाने की परंपरा है जिसमें आस- पास की महिलाओं द्वारा मनाने के लिए उनके पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। उसके बाद ही लाए गए उपहारे को दिया जाता है व इस दिन घर की बेटी, भांजी व नंनद को खाना खिलाया जाता है व भोजन के पश्चात उनको कुछ विशेष उपहार देकर विदा किया जाता है।

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