Rajasthan Tribes Art: राजस्थान जिसे राजाओं और महाराजाओं की भूमि कहां जाता है। भारत का यह राज्य सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। राजस्थान पूरी दुनिया में स्वादिष्ट भोजन, भव्य वास्तु कला और विशाल रेगिस्तान की ऊंची ऊंची टीलो के कारण लोकप्रिय है। यह राज्य अपनी कला के लिए भी जाना जाता रहा है इस राज्य की एक अपनी कला है, इस कला का विस्तार आज पूरे विश्व में पहुंच चुका है। एक ऐसी कला जो बेहद खूबसूरत और आकर्षक है, इसका नाम मांडना पेंटिंग है। इस राज्य ने ही इस कला को जन्म दिया है।
मांडना पेंटिंग
मांडना शब्द मंडन से बना है, जिसका अर्थ होता है सजाना या सुंदर बनाना और मांडना का मतलब सुंदर चित्र बनाना होता है। यह एक ऐसी आदिवासी कला है,जो वर्तमान में ही पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध हुई है। मांडना पेंटिंग एक सजावटी आदिवासी कला है। आदिवासी समुदाय इस कला के पहले चित्रकार है। इस पेंटिंग को दिवार और फर्श पर बनाया जाता है।
आज के समय में यह पेंटिंग भारत के कई हिस्सों में देखने को मिलती है। इस कला के माध्यम से यह राज्य अपनी पहचान पाता है। यह पेंटिंग बनाना काफी सरल होता है, यह एक आसान जटिल डिजाइन है, जिसे एक आकर्षक कला के रूप में पहचान दी जाती है। इस कला को सांस्कृतिक देवता, वैदिक यज्ञ की वेदियों पर मांडा जाता है। इस कला में मोर की डिजाइन सबसे अधिक मांग वाली डिजाइन होती है। इस कला का उपयोग पारंपरिक कपड़ों और आभूषणों पर सुंदरता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।
मंडाना कला का इतिहास
इस कला की उत्पत्ति वैदिक युग 1500 से 500 ईसा पूर्व तक की मानी जाती है। ऐसी ही एक और वास्तु पुरुष मंडल कला है, जो की पूजा की वेदियों और प्राचीन वैदिक मंदिरों की वास्तुकला है। मंडला कला और वास्तु पुरुष मंडल कला की डिजाइन में प्राय: समानताएं मेल खाती है। मंडाना कला दीवारों और फर्श पर की जाती हैं। मंडाना शब्द गुज्जर भाषा से निकला है। राजस्थान के टोंक और सवाई माधोपुर के कुछ गांव जहां पर मंडला कला का बहुत प्रचलन है।
मंडाना कला से होता है दैवीय शक्तियों का आगमन
भारत में प्राय ऐसा माना जाता है कि त्योहारों के समय यदि घर पर मंडाना पेंटिंग बनाई जाती है तो दैवीय शक्तियों का आगमन होता है जिसके कारण बुरी शक्तियों घर से भाग जाती हैं इसलिए इस कला को राजस्थान राज्य में बहुत महत्व दिया जाता है और दैवीय शक्ति के स्वागत के लिए घरों की दीवारों पर मंडाना पेंटिंग बनाई जाती है मानना पेंटिंग बनाने के बाद घर की सुंदरता में भी चार चांद लग जाते हैं यह पेंटिंग बेहद ही खूबसूरतहै। यह कला विशेष रूप से नवरात्रि और दीपावली पर बनाई जाती है। आज राजस्थान में होटलों और पर्यटक पैलेस पर इस कला की पेंटिंग को बड़े पैमाने पर बनाया जाता है।
मंडला पेंटिंग बनाने का तरीका
मांडला पेंटिंग बनाना अपने आप में एक कला होती है। इस पेंटिंग को मिट्टी, पानी और गाय के गोबर के मिश्रण से बनाया जाता है। सबसे पहले फर्श को और मिट्टी, पानी और गाय के गोबर का मिश्रण बनाकर लीपा जाता है, इसे सूखने के बाद टहनियां, गिलहरी के बाल और कपास के एक छोटे से हिस्से से लाल रंग और सफेद रंग से इस पेंटिंग को बनाया जाता है। इस पेंटिंग को ज्यादातर घर की महिलाओं के द्वारा ही बनाया जाता है।जब घर में मंडाना चित्रित किया जाता है तो एक अलग ही हर्ष और उल्लास होता है, यह अच्छाई की मौजूदगी और बुराई को दूर भगाने का प्रतीक माना गया है।
पेंटिंग की वास्तुकला
इस पेंटिंग का एक अलग प्रकार वास्तु कला पर निर्भर करता है। दीवारों और फर्श पर बिंदुओं को अंकित करके त्रिकोण, आयत और वर्ग जैसी आकृति बनाई जाती है, मंडला पेंटिंग का जालीदार स्क्रीन बहुत प्रसिद्ध है। इस पेंटिंग को एक बार में ही पूरी तरह तैयार किया जाता है इसे मिटाने का आपके पास कोई विकल्प नहीं होता है। इस कला को ना तो सिखाया जाता है और ना ही पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाता है, बल्कि घर की महिलाओं से घर की बेटियों को यह काम खुद ही सीखना पड़ता है।
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