Rajasthan Culture: राजस्थान अपनी अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है जिसमें कुछ परंपरा ऐसी भी है जो केवल राजस्थान के ग्रामीण इलाकों की जनजातियों द्वारा ही निभाई जाती है। इन परंपराओं का निभाए जाने का चैनल लंबे समय से चलता हुआ है जिसे राजस्थान के कई क्षेत्रों में आज भी उसी तरह निभाया जाता है,तो आईए जानते हैं आमंत्रण की ऐसी परंपरा के बारे में जिसमें एक अलग अंदाज से निभाया जाता है।
नोतरा प्रथा का उद्देश्य
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक ऐसी आमंत्रण की परंपरा है जिसे वहां की वागड़ी जनजाति द्वारा नोतरा प्रथा कहा जाता है, यह नोतरा प्रथा सामाजिक कल्याण और परस्पर एक दूसरे के सहयोग से लंबे समय से चलती हुई आ रही है। इस परंपरा को निभाए जाने का उद्देश्य शादी विवाह या किसी विशेष अवसर पर होने वाले खर्चों में अपना योगदान देकर उन अवसरों को पूरा किया जाता है। यह प्रथा सालों पहले शुरू हुई थी, उस समय इसे शुरू करने के पीछे का कारण शिक्षण संस्थानों में भौतिक सुविधाओं की व्यवस्था के लिए राशि इकट्ठा करके उन्हें शुरू करना था।
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नोतरा प्रथा की परंपरा
नोतरा प्रथा में पीले और लाल रंग के चावल के दाने लिए जाते हैं, जिनको दहलीज पर रखकर निमंत्रण दिया जाता है। इस निमंत्रण में चावल के दोनों रंग की अपनी एक अलग मान्यता है, जिसमें पीले रंग के चावल को रिश्तेदार परिचितों को निमंत्रण देने के लिए वहीं लाल चावल को आर्थिक सहायता के लिए दहलीज पर रखा जाता है। जिससे घर की दहलीज पर पहुंचने वाले लोग चावल का रंग देखकर यह समझ जाते हैं कि उसे निमंत्रण को क्यों दिया गया है उसके बाद अपनी क्षमता के आधार पर वह उनको उपहार देते हैं।
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