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RTE: आरटीई के तहत सरकार की ओर से निजी स्कूलों को मिलने वाली पुनर्भरण राशि में पिछले चार साल से कोई बदलाव नहीं किए गए हैं। आज भी प्रदेश के भी निजी स्कूलों को बच्चों की किताबों के लिए मात्र 202 रूपए मिलते हैं।

RTE: आरटीई के अंतर्गत राज्य के कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। ऐसे बच्चों के लिए सरकार की ओर से पुनर्भरण राशि दी जाती है। लेकिन पिछले चार साल से बढ़ती महंगाई के बावजूद पुनर्भरण राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आज भी निजी स्कूलों को बच्चों की किताबों के लिए मात्र 202 रुपए दिए जा रहे है।  

बढ़ती महंगाई में घटी यूनिट कॉस्ट
बता दें कि आरटीई के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली पुनर्भरण राशि की यूनिट कॉस्ट पिछले 9 साल से घटती जा रहा है। जानकारी के अनुसार साल 2015-16 तक स्कूलों को बच्चों के लिए 17582 रुपए दिए जाते थे। वहीं साल 2016-17 में 14919, 2017-18 में 13754, 2018-19 में 13536, 2019-20 में 10579, 2020-21 में 11802 व 2021-22 से अब तक 13535 रुपए हैं। कई निजी स्कूलों की फीस के मुकाबले यह राशि एक चौथाई से भी कम है। ऐसे में हर साल बढ़ती महंगाई के बीच यूनिट कोस्ट घटती जा रही है, जिसके कारण निजी स्कूलों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।  

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कोर्स से दस गुना कम मिला है पैसा
राज्य के निजी स्कूलों को आरटीई के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों की किताबों का खर्च भारी पड़ रहा है। पुनर्भरण राशि के तौर पर सरकार स्कूलों को केवल 202 रुपए प्रति विद्यार्थी दे रही है, जबकि यह पैसा बच्चों के कोर्स से पांच से 10 गुना तक कम है। वहीं यह राशि भी शिक्षा विभाग की ओर से पूरा सत्र खत्म होने के बाद बच्चों के ही खाते में दी जाती है। ऐसे में सत्र की शुरुआत में बच्चों को किताबें देकर पूरे सत्र की पढ़ाई करवाने में निजी स्कूलों के हाथ में ये राशि भी नहीं आ रही है। इसको लेकर स्कूल संचालकों में आक्रोश देखने को मिल रहा है।

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