Rajasthan great mathematician: गणित एक ऐसा सब्जेक्ट है जो बहुत सारे छात्रों को बिल्कुल भी समझ नहीं आता है तो वहीं बहुत से ऐसे छात्र है जिनय यह फेवरेट विषय होता है। गणित से जुड़े सवाल, जियोमेट्री, थ्योरम्स आदि हल करते करते बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाते है। यह तो सभी को मालूम है कि जीरो का अविष्कार देश के महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने किया था लेकिन क्या आप जानते हैं कि नेगेटिव नंबर्स क खोज करने वाले भारत के राजस्थान के रहने वाले थे।
कौन थे ब्रह्मगुप्त?
प्राचीन गणितज्ञ सुनते ही हमारे दिमाग में रामानुजन, आर्यभट्ट या फिर वराहमिहिर का नाम सामने आता है। लेकिन एक और ऐसे गणितज्ञ है जिन्हें भले ही पहचान कम मिली लेकिन गणित के क्षेत्र में उनका योगदान अनदेखा नहीं किया जा सकता है। राजस्थान के भीनमाल में 598 ईसवीं में जन्मे जिस्नुगुप्त के पुत्र ब्रह्मगुप्त को भीनमालाचार्य के नाम से भी जाना जाता था। ब्रह्मगुप्त का नाम देश के प्रसिद्ध गणितज्ञों और खगोल शास्त्रियों में शामिल किया जाता है। इन्होंने अपने आविष्कारों से गणित की रूपरेखा तैयार कर इसमें थ्योरम्स को गढ़ा।
‘गणचक्र-चूड़ामणि’
प्राचीन गणितज्ञ व खगोलशास्त्री रहे ब्रह्मगुप्त ने जीरो के उपयोग के अलग-अलग नियमों को विकसित किया था। उन्हें ज्योतिषी भास्कराचार्य ने ‘गणचक्र-चूड़ामणि’ का नाम दिया था। साथ ही उनके दिए गए मूलांकों को ‘सिद्धांत शिरोमणि’ का आधार भी बनाया था।
अंतरिक्ष प्रयोगशाला
ब्रह्मगुप्त के बारें में कहा जाता है कि वे तत्कालीन गुजरात की राजधानी और हर्षवर्धन साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले राजा व्याघ्रमुख के समकालीन थे। भारत की पहले अंतरिक्ष प्रयोगशाला जो एमपी के उज्जैन में स्थापित थी के प्रमुख बनाए गए थे।
ऋण अंक
बता दें कि ब्रह्मगुप्त से पहले 3 माइन्स 4 को भी 0 माना जाता था। लेकिन ब्रह्मगुप्त दुनिया के पहले ऐसे गणितज्ञ थे जिन्होंने नेगेटिव नंबर्स की खोज की थी और ऋण लेकर घटाने के सिद्धांत को भी विकसित किया था।
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