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Government steps for kota suicide: कोटा में बढ़ते सुसाइड के मामलों को देखते हुए सरकार को कुछ बड़े फैसले लेने चाहिए जिससे शहर में सुसाइड के मामलों पर लगाम लगाई जा सकें।

Government steps for kota suicide: राजस्थान के कोटा में पिछले कई सालों से बढ़ रहे छात्रों की सुसाइड के मामलों को लेकर सरकार को कई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बच्चों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कुछ बड़े फैसले लेने चाहिए जिससे शहर में सुसाइड के मामलों पर लगाम लगाई जा सकें। निम्न लिखे बिंदुओं का ध्यान रखते हुए सरकार शहर में आत्महत्या के मामलों पर रोक लगा सकती है।
 
1. समय-समय पर हो मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान संयुक्त प्रवेश परीक्षा (आईआईटी-जेईई) और नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और देश के विभिन्न शहरों से कोटा पढ़ने आए बच्चों का समय-समय पर कोचिंग संस्थानों और सरकार की ओर से मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाना चाहिए। इससे मानसिक रोग जैसे डिप्रेशन आदि की पहचान हो सकेगी और यदि किसी बच्चे में कोई रोग पाया जाता है तो उसके परिजनों को इसके बारे में सूचना देनी चाहिए और सही तरीके से इलाज की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।
 
2. कोचिंग संस्थानों को बच्चों के परिजनों से संपर्क में रहना चाहिए
सरकार की ओर से नियम जारी किया जाना चाहिए जिसमें कोचिंग संस्थान छात्रों के परिवारों से हर समय संपर्क में रहें, ताकि बच्चे को परिवार का सपोर्ट मिलता रहे।

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3. स्कूली पाठ्यक्रम में होना चाहिए मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी अध्याय
सरकार को स्कूली पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी अध्याय को शामिल करना चाहिए। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य की अवधारणा, जीवन प्रबंधन और साइकोलॉजिकल फर्स्ट ऐड को भी इसमें शामिल करना चाहिए।
 

4. नशे के रोकथाम के लिए कानून
सरकार को नशे के रोकथाम के लिए कानून पेश करना चाहिए, जिससे परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को किसी भी प्रकार के नशे से दूर रखा जाएं। साथ ही नशे की रोकथाम संबंधी कार्यक्रम, अधिक से अधिक काउंसलिंग सेंटर और मानसिक रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता कोचिंग संस्थानों में होनी चाहिए।
 
5. मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करानी चाहिए
सरकार की ओर से कोटा में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जानी चाहिए, इसके तहत हर कोचिंग संस्थान में कम से कम दो से तीन साइकाइट्री होना जरूरी होना चाहिए

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