Rajasthan Chilli Farming: राजस्थान का भरतपुर जिला, जिसकी जनसंख्या (2011 के अनुसार) लगभग 14,75,707 है और यह जिला करीब 5,066 किलोमीटर स्क्वायर में फैला हुआ है। भारत जिले में बहुत बड़े स्तर पर सरसों की खेती की जाती है। जिसमें कुछ से कुछ किसान सब्जी और बागबानी की खेती भी करते हैं। लेकिन इस जिले का एक गांव ऐसा है जहां लगभग 95% से ज्यादा लोग हरि मिर्च की खेती करते हैं।
किसानों का मानना है कि इस खेती में लगत बहुत कम आती है और मुनाफा अधिक मिलता है। पहले किसानों को पैसा कमाने के लिए बाहर दूसरे राज्य जाकर मजदूरी करनी पड़ती थी। लेकिन अब इस गांव के लोग केवल मिर्ची की खेती करते हैं। मिर्च की खेती करने से किसानों की किस्मत में चार चंद लग गए हैं और मुनाफा दिन दोगुना रात चौगुना हो गया है।
हरि मिर्ची की खेती की कितनी लागत और मुनाफा
किसानों का कहना है कि पहले वे पारंपरिक खेती किया करते थे। बाद में उनकी जान पहचान आगरा के गांव के लोगों से हुई, जहां से उन्हें इस मिर्ची की खेती के बारे में जानकारी मिली। शुरुआत में तो कम ही किसानों मिर्ची की खेती की। लेकिन जब इस खेती में किसानों को मुनाफा ज्यादा दिखने लगा तो ज्यादातर किसान हरि मिर्च की ही खेती करने लगे। अब लगभग गांव के 95% किसान मिर्च की ही खेती करते हैं।
किसानों का कहना है कि उनकी 35,000 की लागत में उन्हें लगभग 1 लाख तक का मुनाफा हो जाता है। बुराना गांव के किसानों की सलाना मिर्ची से कमाई लगभग 2 करोड़ 50 लाख है। इनकी इस मिर्च को आसपास के उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब जैसे कईं बड़े राज्यों में भेजा जाता है।
कितनी जगह में कितना उत्पादन
किसानों का कहना है कि मिर्ची उत्पादन में सबसे पहले एक मेड बनाई जाती है। जिसमें मिर्ची के बीज डाले जाते हैं और जब बीज बड़े हो जाते हैं, तो 2 महीने बाद मिर्ची देना शुरू कर देते हैं। किसान 1 बीघा जमीन में लगभग मिर्ची की 8 बार तुड़ाई कर लेते हैं, जिससे कुल लगभग 80 क्विंटल की मिर्ची का उत्पादन हो हो जाता है।
इस मिर्ची की खेती में गांव की महिलाएं भी किसानों का साथ देती हैं। महिलाओं को इससे रोजगार का अवसर मिला है। जिससे मिर्ची उत्पादन में बहुत फायदा होता है। अब गांव के लोगों को अपनी रोजीरोटी कमाने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता।
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