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Famous berries of rajasthan: राजस्थान का बीकानेर, नागौर और बाड़मेर जैसे क्षेत्रों में बेर की अधिक मात्र में खेती की जाती है। बता दें कि बेरों की गुठलियों को सूखाने के बाद उन्हें पीसकर बोरकूट व खट्टा चूर्ण आदि प्रकार के आयुर्वेदिक और इग्लिश दवाइयां तैयार की जाती है।

Famous berries of rajasthan: राजस्थान के नागौर, बीकानेर, बाङमेर नोखा इत्यादि जैसे इलाकों में बेर यानि किसान का सेव काफी दुनिया भर में फेमस है। यहां के बैर के पेड़ों को बोरड़ी या झाड़ी के नाम से जानते है। दीपावली के समय झाड़ियों पर यह बैर लगने शुरू होते है। इन बेरो को कई लोग फल के रूप में खाते हैं। वहीं कई लोग इनकी दवाई बनाकर व्यापार करते हैं।

इन रोगों को ठिक करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं बैर 
बैर के व्यापारी जगदीस बंसल ने जानकारी दी कि शरीर के रक्त प्रवाह को ठीक करने में, हड्डियों को मजबूत करने में, कैसर के रोकथाम, वजन नियंत्रण करने और अनिद्रा दूर करने के लिए बैर का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि इन बेरों को सूखाने के बाद ही बेरो का उपयोग दवाईयां बनाने के लिए किया जाता है। 

ऐसे तैयार की जाती है दवाइयां 
सबसे पहले बैर को सुखाने का कार्य किया जाता है इसके बाद यहां से व्यापार कर बाहर कंपनियों में भेजा जाता है। सूखे हुए बेरों को पीसकर बोरकूट व खट्टा चूर्ण आदि प्रकार के आयुर्वेदिक और इग्लिश दवाइयां तैयार की जाती है। इन बेरो का इस्तेमाल कई प्रकार के रोगों का निदान करने जैसे गले का रोग, पोट से जुड़ी समस्या आदि में इस्तेमाल किया जाता है। 

बैर की गुठलियों का बनता है चूर्ण00
बैर की गुठली को सूखाकर फिर पीसकर एक खास चूर्ण तैयार किया जाता है। सुबह-शाम तीन ग्राम चूर्ण ताजे पाने के साथ खाने से और 20 ग्राम का बेर की गुठली मींगी को पानी में घिसकर पीने से भस्मक रोग यानि बार-बार भूख लगना वाली बिमारी को दूर करता है। इसके अलावा इसकी गुठलियों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाई और चूर्ण तैयार करने के लिए किया जाता है। बता दें कि सूखे बैर में कैल्सियम और फॉस्फोरस की काफी मात्रा पायी जाती हैं। इससे शरीर की हड्डियों को मजबूती मिलती है और यह शरीर को मस्सकूलर डिजीज से बचाती है।

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