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Rajasthan: राजस्थान के तीर्थ स्थलों पर बंदर और श्वान को बिस्किट, मिश्री, लड्डू, चूरमा, मीठा दूध, मिठाइयां देने के कारण जानवरों में हाइपरकेराटोसिस बीमारी फैलती जा रही है। इसके बीमारी के चलते कई जीवों के बाल उड़ने लगे हैं।

Rajasthan: राजस्थान में ग्रहों की उल्टी चाल को सही करने के लिए लोगों द्वारा कई प्रकार के दान पुण्य किए जाते हैं और इसके बाद जानवरों और जीवों भोजन कराने का भी प्रथा है। इसी भोजन के चलते जीवों में एक खतरनाक बीमारी पैदा होती जा रही है। बिस्किट, मिश्री, लड्डू, चूरमा, मीठा दूध, मिठाइयां के कारण बंदर और श्वान हाइपरकेराटोसिस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसके बीमारी के चलते जीवों के बाल उड़ने शुरू हो गए और उनकी चमड़ी से खून निकलने लगा है। समय के साथ-साथ यह बीमारी अब मनुष्यों में भी फैल रही है। बता दें कि पशु चिकित्सालय की ओपीडी में हर दिन 10 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। 
 
लगातार फैल रही ये बीमारी 
अलवर के किशनकुंड, प्रतापबंध, आड़ा-पाड़ा, भूरा सिद्ध, सिलीसेढ़, अकबरपुर समेत अन्य तीर्थ स्थानों के पास कई बंदरों और कुत्तों में इस बीमारी के लक्षण पाए गए है। यहां के कई जीवों में खुजली होने से बाल झड़ गए और चमड़ी उतरने से शरीर से खून तक रिसता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बंदरों और कुत्तों की बीमारी के कारण मौत भी हो चुकी है। इसमें खुजली इतनी ज्यादा होती है कि जीव खुजाते-खुजाते ही मर जाते है। खतरनाक बात यह है कि यह एक जानवर से दूसरे में लगातार फैलती जा रही है। 

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इस कारण से बढ़ रहे हैं मामले
बंदर अक्सर मूल, फल, गाजर, मूली, सब्जियां खाते है, लेकिन तीर्थ स्थानों पर वे बिस्किट, मिश्री, लड्डू, चूरमा, मखाने आदि खा लेते है, जिसकी वजह से यह बीमारी फैल रही है। 
 
लावारिस पशुओं में ज्यादा पाए जा रहे केस 
अलवर के बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय के उपनिदेशक डॉ.सरबजीत सिंह ने बताया कि मीठा खाने और शुगर लेवल बढ़ जाने की वजह से जानवरों में हाइपरकेराटोसिस बीमारी होती है। प्रतिदिन पशु चिकित्सालय की ओपीडी में 10 से 15 मामले केवल इस बीमारी के आ रहे हैं। लावारिस श्वान में यह बीमारी ज्यादा पाई जा रही है, लेकिन बारहसिंगा में भी लक्षण देखे जा रहे हैं।

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