Tips to reduce depression: तनाव एक स्वाभाविक भावना होती है, जो किसी इंसान को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से लड़ने और उनसे बाहर निकलने में मदद करती है। किसी बात पर थोड़ी मात्र में तनाव लेना अच्छा होता है, क्योंकि इससे आपको अपनी परीक्षा में कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है, लेकिन जब यह तनाव एक बच्चे पर हावी हो जाता है तो बच्चे इस मानसिक रोग से नहीं निकल पाते हैं और गलत कदम उठा लेते हैं।
ऐसे में मनोवैज्ञानिक बच्चों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी सलाह देते हैं कि यदि आपका बच्चा किसी प्रकार के मानसिक तनाव से जूझ रहा है तो किसी डॉक्टर की सलाह लें। मनोवैज्ञानिक ने अनुसार कम नंबर आने पर या फिर किसी परीक्षा में फेल हो जाने पर परीजनों को बच्चों को बुरा नहीं कहना चाहिए। उन्हें शर्मिंदा करने या उन्हें डांटने-फटकारने की बजाए उनका हौसला बढ़ाएं।
तनावग्रस्त होने के संकेत
आजकल के बच्चों में पढ़ाई और करीयर को लेकर काफी तनाव होता है। मनोवैज्ञानिक के मुताबिक बच्चे की कुछ गतिविधियों से यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चा तनावग्रस्त है या नहीं। तनाव के कारण बच्चे अक्सर चिड़चिड़ा महसूस करते है, सारा समय किसी चिंता में खोए रहते है, नींद कम आना, ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है, नाखूव चबाना, अपनी त्वचा को नोचना या फिर अपनी दाँत पीसना, लोगों पर झपटना, तेज सांस फूलना या फिर तेज़ गति से सांस लेना। यदि यह लक्षण किसी बच्चे में पाएं जाते है तो हो सकता है वो बच्चा किसी प्रकार के तनाव से जूझ रहा है।
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डिप्रेशन से बचने के लिए क्या करें?
तनाव या फिर डिप्रेशन से बचने के उपाय करने से पहले आपको यह जानना जरूरी होगा कि आपको चिंता किस बात की हो रही। ज्यादातर युवा अपनी परीक्षा और करियर को लेकर चिंतत रहते हैं, वहीं कुछ लोगों को पैसों या रिश्तों की चिंता रहती है। इसके बाद आप अपनी जीवशैली में कुछ सुधार कर इससे बच सकते हैं। जैसे आपको शारीरीक रूप से सक्रिय रहना है। शराब का सेवन ना करें और अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आराम और नींद के लिए समय निकालें। कैफिन युक्त नशीली दवाओं के सेवन से दूर रहें। अपने भविष्य के बारें में ज्यादा चिंता ना करें और खुद की कभी भी किसी से तुलना ना करें।