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Most Polluted Cities: IQAir की लिस्ट सामने आई, जिसमें राजस्थान के 3 शहर दुनिया की सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। प्रदूषण बढ़ने से लोगों की उम्र 5.2 साल कम होती जा रही है।

Rajasthan Pollution: दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट जारी हो चुकी है। जिसमें राजस्थान के 3 शहर भी शामिल हैं। 3 के 3 शहर NCR में लगते हैं। जिससे प्रदेश के अन्य शहरों की तुलना में ये शहर ज्यादा प्रदूषित रहते हैं। यह रैंकिंग IQAir की 2024 वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट के दी गई थी। लिस्ट में राजस्थान का श्रीगंगानगर 16वे नंबर पर, भिवाड़ी शहर 19वे नंबर पर और हनुमानगढ़ शहर 21वे नंबर पर हैं। मेघालय का बर्निहाट शहर दुनिया का सबसे प्रदूषित और देश की राजधानी दिल्ली लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। 

लगातार घट रही है उम्र

रिपोर्ट के अनुसार, एयर पॉल्यूशन भारत में स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। इस एयर पॉल्यूशन से इंसानों की उम्र 5.2 साल कम होती जा रही है। देश के लगभग 35% शहरों में PM2.5 का लेवल WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) के लेवल से 10 गुना अधिक चल रहा है। शहरों में चल रही गाड़ियों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, कारखानों का एयर पॉल्यूशन, फसलों को जलाना, कंस्ट्रक्शन से समय उड़ने वाली धूल से एयर पॉल्यूशन लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में गाड़ियों अधिक होने से पॉल्यूशन ज्यादा होता है। इसके अलावा पंजाब-हरियाणा राज्यों में पराली जलाने से भी पॉल्यूशन का लेवल बढ़ रहा है। 

सुप्रीम कोर्ट का क्या है कहना

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में कहा था कि हवा में सांस लेना एक मौलिक अधिकार है और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तरप्रदेश की सरकारों को प्रदूषण कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए। 

साथ ही कोर्ट ने कहा था कि वायु प्रदूषण के खतरनाक लेवल को कम करने के लिए GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) को लागू करना चाहिए। साथ ही GRAP में गंभीर चूक करने के लिए दिल्ली के अधिकारियों की आलोचना भी की थी। 

पॉल्यूशन कंट्रोल करने में आ रही हैं परेशानियां

WHO के मुताबिक, 2021 में एयर पॉल्यूशन से लगभग 81 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी। जिसमें से 58% लोगों की मौत तो PM2.5 के कारण हुई थी। UN (संयुक्त राष्ट्र) ने भी स्वच्छ हवा को सार्वभौमिक मानव अधिकार बताया है, जो भारत को वायु प्रदूषण से निपटने के लिए मजबूत नीतियों और प्रवर्तन की आवश्यकता को समझता है। लेकिन प्रदूषण को रोकने और कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ वायु प्रदूषण जैसे कार्यक्रम भी सरकार के लिए चलना चुनौती बनी हुई है।

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