Rajasthan Bundi Painting: चित्रकला के क्षेत्र में भी राजस्थान काफी आगे है। बूंदी एक नगर जो हाड़ोती क्षेत्र में हाडा राजाओं की राजधानी भी रह चुका है। बूंदी चित्रकला शैली की शुरुआत 16वीं शताब्दी के मध्य से मानी जाती है। यह शैली राजाराम सूरजमन सिंह के समय में विकसित हुई थी।
बाद में कईं राजा आते गए और इस शैली का विकास ओर बढ़ता चला गया। इस शैली का विकास राजा रतन सिंह, छत्रसाल भाव सिंह, अमृत सिंह, उम्मेद सिंह और राम सिंह ने किया। सभी ने इस शैली को जीवित रखा, जिसकी वजह से यह शैली आज भी मौजूद है। बूंदी शैली के कईं चित्र, जो काफी पुराने हैं, वह आज विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम, लंदन में संग्रहित करके रखे हुए हैं।
बूंदी चित्रकला शैली की खासियतें:
इस चित्रकला में राग दीपक और रागिनी भैरवी के चित्र सबसे ज्यादा मशहूर हैं। इस कला के ज्यादातर चित्रकारों ने रीतिकाल साहित्य को अपनी कला का विषय मानकर, उस पर चित्र बनाए हैं। रसिकप्रिया के अंतापुर के चित्र, घुड़सवारी के चित्र और दरबारो के चित्र इसी कला की विशेषता है। 16वी शताब्दी के बाद 18वी सदी तक आते आते इस चित्रकला में कईं बदलाव देखे गए और 18वी सदी में यह कला अपने चरम पर थी।
बूंदी चित्रकला की रेखाएं कोमल होने के साथ साथ गति पूर्ण और भाव प्रधान भी हैं। चित्रों में संपन्न सिंगुर रंग और पीले व हरे रंग का प्रयोग किया गया है। चित्रों में सघन प्राकृतिक सुषमा देखने को मिलती है। गहरे नीले रंग के आकाश में उड़ते बादल से युक्त हैं, इस चित्रकला के चित्र। इस चित्रकला में मनुष्यों की ऊंचाई लंबी, इकहर बदन, आम के पत्तों के जैसी आंखे, गोल चेहरे, छोटी नाक, पतले होंठ बनाए गए हैं। स्त्रियों के कपड़ों में काले लहंगे और लाल चुनियों का प्रयोग किया गया है।
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