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Kayamkhani Muslim: राजस्थान के झुंझनु में रहने वाले कायमखानी मुसलमान आम मुसलमानों की तरह अपने महजब के नियम कानूनो का अनुसरण करते हैं, लेकिन शादी और नामकरण में हिन्दू धर्म के रीति रिवाजों के आधार पर करते हैं।

Kayamkhani Muslim: राजस्थान के झुंझनु में एक ऐसा मुस्लिम समुदाय है, जिनकी धार्मिक आस्था तो इस्लाम है, लेकिन उनका एक हिस्सा हिंदू धर्म की परंपराओं से जुड़ा है। घर में किसी की शादी हो या नामकरण इनमें हिन्दु धर्म के रीति रिवाजो का अनुसरण करते हैं, या फिर ये भी कह सकते हैं कि उनके ये रीति रिवाज हिंदु धर्म से मिलते जुलते हैं। 

कायमखानी मुसलमान, देश के बाकी मुसलमानों जैसे होकर भी इसलिए उनसे थोड़ा अलग हैं, क्‍योंकि इस कायमखानी समाज में सभी मांगलिक कार्य हिंदू रीति रिवाज की तरह किए जाते हैं, ये कायमखानी मुसलमान आम मुसलमानों की तरह रोजे रखते हैं, पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं, लेकिन शादी और नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों को हिन्दू रिवाजों की तरह करते हैं। 

राजपूत समाज की जैसी रस्में 

राजस्थान के झुंझनूं जिले में स्थित भाटी परिवार में निकाह की तैयारी की जाती है, लेकिन उनकी रीति-रिवाज हिंदू धर्म की संस्कृति से मिलते हैं, जिसमें दुल्हे के ससुराल से आई थाली में शगुन की चीजों के साथ तिलक लगाकर नारियल भी रखा जाता है। इसमें दूल्हे द्वारा बहनों को चुनरी ओढ़ाने की रस्म भी निभायी जाती है। चुनरी ओढ़ाने की परंपरा मुस्लिम समाज में नहीं होती, ये केवल राजपूतों में ही होती है, लेकिन ये रस्म राजपूत के अलावा कायमखानी मुसलमानों में भी होती है।

कायमखानी मुसलमानों की हल्दी रस्म

आमतौर पर मुसलमानों में भी हल्दी रस्म होती है, लेकिन कायमखानी मुसलमानों में ये रस्म राजपूतों की तरह होती है, जिसमें दूल्हे को हल्दी पैरों से शुरू करके, घुटने, कंधे, चेहरे और फिर सिर पर लगाई जाती है। इसमें हल्दी लगाते वक्त सिर को रुमाल से ढका जाता हैं। ऐसे हल्दी लगाने का तरीका हिंदुओं में ही होता है इसी परंपरा को निभाते हुए दुल्हे के हाथों में कंगना भी बांधा जाता है।

शादी वाले दिन बारात आने से पहले कायमखानी समुदाय में दूल्हा और दुल्हन दोनों के घर भात की रस्म भी की जाती है। यानी लड़का या लड़की के मामा कपड़े, पैसे आदि लेकर आते हैं बहन अपने भाइयों को पटरे पर खड़ा करके उनकी आरती उतारती है, इसके बाद दूल्हे को पटरे पर खड़ा करके आरती करती है। ये एक ऐसी प्रथा है, जो आज भी हर राजपूत घर में होती हैं।

कायमखानी मुसलमान का इतिहास

कायमखानी मुसलमानों का राजपुताना समुदाय से सदियों पुराना नाता था, इन लोगों द्वारा इस्लाम को अपनाया गया है, लेकिन राजपुताना की इन परम्पराओं से नाता नहीं तोड़ा जो उन्हें विरासत में मिली थी। कायखानी मुसलमानों का इतिहास तेरहवीं सदी से जुड़ा हुआ है, जब दिल्ली में तुगलकी शासन था। सेनापति सय्यद नसिर को करम सिंह में कुछ दिव्य शक्ति नजर आई।

जिसकी जानकारी उन्होंने फिरोज शाह तुगलक को देने पर तुगलक ने करम सिंह को दिल्ली का न्योता भेजा था। इसके बाद ही दिल्ली में ही करम सिंह की शिक्षा दीक्षा हुई और बाद में करम सिंह ने इस्लाम को अपना लिया और कायम खान बन गए। यहीं से कायमखानी वंश की शुरुआत हुई। कायमखानी मुसलमानों में आज लगभग रिवाज़ राजपूतों के, इसकी वजह ये है कि करम सिंह कायम खान तो बन गए लेकिन राजपूताना गौरव से नाता जोड़े रखा।

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