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Rajasthan Wooden Craft: बस्सी चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित एक ऐतिहासिक कस्बा है, जो काष्ठ कला के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहाँ की काष्ठ कला की विशेषताएँ और इसके निर्माण प्रक्रिया की बारीकियाँ इसे खास बनाती है।

Rajasthan Wooden Craft: राजस्थान में काष्ठ कला को प्राचीन समय से देखा जाता रहा है, जो कि चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी कस्बे में काफी प्रसिद्ध है। काष्ठ कला को अंग्रेजी में wooden craft कहते हैं। इस कला में मूर्तियों को हाथों में बनाया जाता है। आपको बता दें कि कष्ट शब्द का मतलब लकड़ी भी होता है। इस कला को राजस्थान में काफी प्रसिद्ध माना जाता है क्योंकि इसमें हाथों से लकड़ी पर कारीगरी की जाती है।

सबसे पहले बनाई गई थी ये तस्वीर

इस कला को सबसे पहले प्रभात जी 'सुतार' से शुरू किया था। यह बात है लगभग 355 साल पुरानी। इनके द्वारा सबसे पहले लकड़ी पर गणगौर नामक तस्वीर बनाई गई थी। काष्ठ कला में कुछ प्रमुख उत्पाद हैं जैसे लकड़ी के सोफे, कुर्सियां, अलमारी, सजावट के लिए दीवारों में लटकने वाली तस्वीर, मूर्तियां इत्यादि। इस कला में लकड़ी पर सूक्ष्म कारीगरी की जाती है। इस कला के द्वारा एक बार रामायण को भी लकड़ी पर बनाया जा चुका है। 

सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखी जाती है कला

काष्ठ कला में सर्वप्रथम लकड़ी पर कारीगरी होती है। फिर लकड़ी पर पॉलिश करके फिनिशिंग दी जाती है। पूरी प्रक्रिया को लगातार किया जाता है। इस कला में प्रखर और कौशल से भरपूर व्यक्ति ही इस कला में कारीगरी कर सकता है। राजस्थान की संस्कृति का भी नमूना इस कला में देखने को मिलता है। लोककथाओं, धार्मिक प्रतीकों को भी काष्ठ कला से सुसज्जित किया गया है। यह कला यहां की सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखी जाती है।

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