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Sanganeri Print Industry: राजस्थान का सांगानेरी का 1800 करोड़ के कारोबार को मधुमक्खी को मोम और जड़ी बूटियों का उपयोग करके बनाया जाता हैं। 

Sanganeri Print Industry: राजस्थान जो अपने परिधान के लिए जाना जाता है। वहीं यहां की संस्कृति का एक हिस्सा राजस्थानी वेशभूषा भी है। जिसके कारण देश के लोग ही नही बल्कि बाहर के लोगो में इसका प्रचलन है। इसके साथ ही इन कपड़ों के अलग-अलग प्रिंटिग के डिजाइन है जो इन परिधानों को और भी ज्यादा आकर्षक बनाती हैं।

सांगानेरी प्रिंट जो की राजस्थान की सबसे पुरानी प्रिंट है, जिसकी वजह से राजस्थान की वेशभूषा को एक पहचान मिली है। इस सांगानेर प्रिंट का सबसे खास बात ये है कि इसको रंग करने के लिए कृत्रिम रंगों की जगह प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता हैं। ये प्रिंटिग भले ही अभी प्रचलन में आई है, लेकिन इसको बने जाने की शुरात राजा  महाराजाओं के समय से ही हो गई थी। 

राज परिवार से प्रिंटिग की शुरुआत

सांगानेर प्रिंटिग की शुरूआत राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुई थी, जो वर्तमान में प्रिंटिग का अड्डा बन गया है। आमेर नरेश पृथ्वीराज के 19 पुत्रों थे, जिसमें से उन्होने जयपुर बसने से पहले सभी पुत्रों से पहले सांगा को संग्रामपुरा का शासक बनाया था। एक यही कारण था की यहां का नाम सांगानेर पड़ा, इसके बाद ही यहां प्रिंट का काम शुरू किया गया था। 

इसकी छपाई आमेर के राजशाही परिवार द्वारा की गई थी। इस काम के लिए उन्होने खत्रियों को बुलवाया था, जो गुजरात से आए थे। धीरे  धीरे ये पूरे देश में फैल गया, उसके बाद ही 2019 में पिंक सिटी जयपुर से 200 करोड़ से भी ज्यादा सांगानेरी प्रिंट को भिजवाया गया। जिसकी वजह से आज 1800 करोड़ का कारोबार फैल गया है। 

सांगानेरी प्रिंट की विशेषता 

सांगानेरी प्रिंट जो देश में अपना एक खास स्थान बनाए हुए है। सागांनेरी प्रिंट में प्राकृतिक रंगो का प्रयोग किया जाता है और इसके साथ ही इस प्रिंट को बनाने में मधुमक्खी के मोम और जड़ी बूटियों का  उपयोग करके बनाया जाता हैं। इस प्रिंट में प्रकृति की डिजाइन जैसे- फूल- पत्ती, पक्षी या मंत्रो की भी प्रिंट बनायी जाती है।

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