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Udaipur Thikari Art: मेवाड़ की सैकड़ों साल पुरानी ठीकरी कला में कांच के टुकड़ों को जोड़कर आकर्षक सामान बनाए जाते हैं, इस कला की मांग भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी की जाती है।

Udaipur Thikari Art : राजस्थान अपने इतिहास के साथ अपनी अलग-अलग कलाओं को लेकर देश भर में विख्यात है, इसमें कई कला ऐसे भी हैं, जो आज भी सैकड़ों साल पुरानी राजा महाराजों के समय से चलती आ रही है। उन्ही में से एक उदयपुर का ठीकरी कला है, जिसको अभी तक कई फोर्ट में संभालकर रखे हुए हैं। 

ठीकरी कला की कारीगरी 

उदयपुर में ठीकरी कला की कारीगरी करने वाले कलाकारों ने बताया कि यह सदियों पुरानी कला है, जो आज अभी भी मेवाड़ के किलों में देखने को मिलती है। इस कला में दीवारों पर कांच के टुकड़ों को बड़ी खूबसूरती से सजाया गया है। यह वही कला है, जिसमें छोटे औजारों से कांच को काटकर आकार देकर उसे चिपकाया जाता है। इस ठीकरी कला में कांच को बड़ी बारीकी से काटा जाता है। इसमें बेकार हुए कांच का भी उपयोग किया जाता है। 

विदेशों में भी ठीकरी कला का आकर्षण

ठीकरी कला की खुबसूरती का कारण कांच है, जो इसकी शोभा बढ़ा देता है। उदयपुर प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है, यहां देश विदेश से पर्यटक घूमने आते हैं, तो वहां दुकान पर सजी हुई ठीकरी कला से निर्मित सामानों को देखकर आकर्षित हो जाते हैं, जिससे ठीकरी कला की विदेशो में मांग बढ़ती जा रही है, जिससे इसके ऑर्डर के आधार पर आकृतिया निर्मित की जाती है। ये कला सजावटी सामानों के साथ घर की दीवार पर भी बनाई जाती है।

ठीकरी कला की लागत

ठीकरी कला को बनाने के लिए 1200 रुपये स्क्वायर फिट शुल्क लेते हैं, लेकिन इस कला का निर्माण करने वाले कारीगरों ने बताया कि 1200 रुपये से तो शुरुआत है, इसके बाद काम के अनुसार लागत तय होती है और ये भी बताया कि इसको बनाते समय इसकी बारीकता का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे इसकी फिनिशिंग होने पर इसे रॉयल लुक दिया जा सके।

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