Unique Village in Rajasthan: क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में एक ऐसा गांव है, जहां के लोग दूध और छाछ बेचते नहीं हैं। वे लोग दूध या दूध से बनी चीजों को बेचना अपने बेटे को बेचने के समान मानते हैं। यहां प्रतिदिन 300 लीटर से ज्यादा दूध होता है लेकिन फिर भी वहां के लोग अपनी परंपरा को नहीं तोड़ते। आइए जानते हैं इस बारे में गांव के लोगों का क्या मानना है?
मालीपुरा कुसमा गांव
बता दें कि इस गांव का नाम मालीपुरा कुसमा गांव है। ये सिरोही जिले के सोनेला पंचायत में पड़ता है। इस गांव का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश के वंशजों ने कराया था। इसके कारण इस गांव का नाम कुसुमा पड़ गया। गांव की खास बात ये है कि यहां पर सबसे ज्यादा सांखला माली जाति परिवार के लोग रहते हैं और वे अपने पूर्वजों के बताए रास्ते पर चल रहे हैं। वे अपनी रवायत को मानते हुए आज भी पशुओं का दूध, छाछ या दही नहीं बेचते हैं।
300 लीटर से ज्यादा दूध होता है रोज
गांव के लोगों का कहना है कि उनके गांव में प्रतिदिन 300 लीटर से ज्यादा दूध होता है। गांव के लोग उसका दही जमाकर फिर छाछ बना देते हैं और उसे मुफ्त में बांट देते हैं। इससे बनाए गए घी को भी या तो खुद इस्तेमाल करते हैं या फिर पूजा के काम में इस्तेमाल करते हैं। दूध, दही, छाछ या दूध से बनी कोई भी चीज नहीं बेचते हैं। ये परंपरा इस गांव में आज भी कायम है और लोग इसका बखूबी पालन कर रहे हैं।
माली जाति के 25 से ज्यादा परिवार
बता दें कि कुसमा मालीपुरा गांव में खांखला माली जाति के 25 से ज्यादा परिवार रहते हैं। ये सभी परिवार खेती और पशुपालन करके अपना जीवन व्यतीत करते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि दूध या उससे बनी चीजें बेचना बच्चों को बेचने के समान है और ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है। ये सभी परिवार ब्रह्माणी मां कुलदेवी व भगवान राम को आराध्य मानते हैं और शराब से भी दूर रहते हैं।
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