Bikaner Textile Manufacturing: राजस्थान के अनोखे पहनावे की डिमांड देश-विदेश में बढ़ने लगी है। राजपूती परिधानों और कॉटन फैब्रिक कपड़ों को लोग ज्यादा पसंद करते है। इन दिनों बीकानेर में राजपूती कपड़ों और कॉटन फैब्रिक कपड़ों पर कारीगरी करने के कार्य जोरो शोरो से किया जा रहा है। इन्हें तैयार करने के बाद देश के कई राज्यों के अलावा विदेशों में भी सप्लाई किया जाता है।
400 से अधिक कारखाने चलते है
आपको बता दें कि शहर में 400 से ज्यादा कारखानों पर यह कार्य किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले एक सफेद कॉटन कपड़ा लिया जाता है। इसके बाद इसपर लहरिया डिजाइन तैयार की जाती है। कारीगर मो. रमजान रंगरेज ने बताया कि इनपर विभिन्न रंगों से डिजाइन बनाई जाती है। बिकानेर से राजस्थान समेत देश व विदेश में यह ड्रेस भेजी जाती है। एक कपड़े को बनाने में लगभग एक से दो दिन का समय लगता है।
रोजाना होती है 150 से 200 कपड़ों पर प्रिंटिंग
बीकानेर शहर के मोहतासराय, गंगा शहर, लाल गुफा के करीब कपड़े की प्रिंटिंग के कई कारखाने मौजूद है। यहां सुबह से शाम तक कपड़ो पर प्रिंटिंग करने का कार्य किया जाता है। यहां प्रतिदिन 150 से 200 कपड़ो पर प्रिंटिंग की जाती है। यहां के कारीगरों ने बताया कि इससे पहले यह काम जयपुर और जोधपुर में किया जाता था, लेकिन कई कारखाने शहर से अलग हो गए और कुछ बंद हो गए। अब प्रिंटिंग का सारा काम बीकानेर में शिफ्ट हो गया है।
कपड़े सुखाने पर मिल जाती है अच्छी दिहाड़ी
बीकानेर के एक कारखाने में कम से कम 8 से 10 लोग काम करते है। कारीगरों द्वारा कपड़ों पर फूल-पत्ती समेत कई डिजाइनें बनाई जाती है। प्रिंटिंग होने के बाद इन कपड़ो को सुखाने का काम किया जाता है। इलाके में कई लोग सड़को पर ही इन कपड़ो को सुखाने ने लिए रख देते है और इस काम के लिए उन्हें दिन का 400 से 500 रूपए मिल जाता है।
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