Meenakari Art: भारत वैसे तो कई प्रकार के आभूषणों के लिए लोकप्रिय है। भारत में अगर कोई राज्य अपने आभूषणों की बनाई के लिए जाना जाता है तो वो है राजस्थान। पूरानी मान्यताओं के मुताबिक, राजस्थान की मीनाकारी कला आभूषणों की बनाई के लिए बेहद प्रसिद्ध है। मीनाकारी कला सिंधु घाटी सभ्यता के समय से चली आ रही है। आपको बता दें कि मीनाकारी कला करीब 16वीं सदी पुरानी है और राजस्थान की यह फेमस कला मुगलों के जमाने से चलती आ रही है। पूरे भारत में राजस्थान की यह कला काफी मशहूर है।
इस प्रकार होती यह कारीगरी
मीनाकारी कला में अलग-अलग प्रकार के रंगों का इस्तमाल किया जाता है। कलर तैयार होने के बाद कारीगर विभिन्न प्रकार के चित्र बनाते है जैसे पशु-पक्षी, फूल-पत्ती और देवी-देवताओं की छवियां बनाई जाती हैं। आज भी राजस्थान के कई फेमस बजारों में आपको ऐसी कई दुकानें मिल जाएगी जिसमें मीनाकारी कला से बने आभूषण बेचे जाते है।
मीनाकारी कला को शैम्पलेव तकनीक से बनाया जाता है, जो दुनिया में केवल राजस्थान में तैयार होता है। शैम्पलेव का मतलब होता हा एक ऐसी जगह जो उठी हुई हो। दरअसल मीना एक ऐसा धातु होता है जिसे गड्ढों से भरा जाता है और मीना के किनारों को बाहर की ओर निकाला जाता है।
सदियों पुराना है इस कला का इतिहास
मीनाकारी कला का इतिहास सदियों पुराना है। माना जाता है लाहौर के कारीगर जब राजा मान सिंह के साथ भारत का दौरा करने आए थे, तब उन्होंने राजस्थान के जयपुर और उसके आस-पास के इलाकों को अपना ठिकाना बनाया था। जिसके बाद धिरे-धिरे उन्होंने इस कला को विकसित किया और कई प्रकार की डिजाइनें तैयार की।