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Kolipura Village Kota: शादियों के गाने बजाने और शहनाइयों की धुन के बीच राजस्थान के इस गांव के लोग सन्नाटे में जीने को मजबूर हैं। इसका कारण आजादी के सालों बाद भी यहां बिजली और नेटवर्क का न पहुंचना है। विस्तार से जानिए क्या है पूरा माजरा?

Kolipura Village Kota: देश भर में शादियों का सीजन चल रहा है और युवा-युवतियां परिणय के सूत्र में बंध रहे हैं। लेकिन राजस्थान में एक ऐसा गांव भी है जहां के युवकों को सेहरा पहनना नसीब नहीं हो रहा है। दरअसल मामला कुछ ऐसा है कि राजस्थान के इस गांव में आजादी के 77 साल बीत जाने के बावजूद विकास की राहत नहीं पहुंच सकी है। 

कोटा में है यह गांव

शादियों का सीजन चल रहा है और ऐसे में हर ओर शहनाइयां बज रही हैं लेकिन, कोटा के कोलीपुरा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसा इसलिए नहीं है कि यहां युवकों की कमी है, बल्कि ऐसा इसलिए है क्योंकि इस गांव में कोई भी पिता अपनी बेटी नहीं ब्याहना चाहता है।

इस वजह से यहां के युवा वर्ग में काफी असंतोष और आक्रोश देखने को मिल रहा है। गांव वालों के मुताबिक इस गांव में विकास की आधारभूत संरचनाओं नहीं पहुंची हैं। इस गांव में ना तो नेटवर्क आता है और आजादी के 77 साल बाद भी यहां बिजली नहीं आई है। ऐसे में लड़की वाले इस गांव में अपनी लड़की की शादी नहीं करवाना चाहते हैं। 

500 परिवारों का है गांव

जहां आज देशभर में 5G नेटवर्क का चलन है वहीं कोलीपुरा गांव एक ऐसा गांव है जहां 4G नेटवर्क भी नहीं पहुंचा है। इस गांव में 500 से अधिक परिवार रहते हैं फिर भी यहां नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है और ना ही भविष्य में यहां ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकती है। ऐसा नहीं है कि यहां संसाधनों की कमी है, लेकिन इस गांव में इन सुविधाओं के न पहुंचने के पीछे का कारण प्रकृति से जुड़ा हुआ है। 

रिजर्व क्षेत्र में बसा है यह गांव 

इस गांव में मूलभूत आवश्यकताओं के न होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह गांव मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में आ जाता है। जब से मुकुंदरा टाइगर रिजर्व का एरिया डिफाइन किया गया है तब से यह गांव भी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में आ गया। रिजर्व एरिया होने के कारण यहां जीवन की बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की इजाजत नहीं है। इतना ही नहीं यहां कोई व्यक्ति अपने घर का निर्माण कार्य भी नहीं करवा सकता है।

क्योंकि इस गांव का विस्थापन होना है लेकिन विस्थापन की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बीच यहां के युवाओं के रिश्ते संकट में आ गए हैं। युवकों को लड़की वालों की ओर से यह कहकर इंकार कर दिया जाता है कि बिना बिजली और नेटवर्क के कैसे उनकी बेटी अपनी जिंदगी इस गांव में बिता पाएगी।

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