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Rajasthan Water Resources: राजस्थान में एक ऐसी भी नदी है, जिसे अर्जुन की गंगा के नाम से जाना जाता है। यह नदी आस-पास के लोगों को जल प्रदान करने के साथ-साथ धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस नदी के तट पर हर साल मेले का भी आयोजन होता है।

Rajasthan Water Resources: अर्जुन की गंगा के नाम से मशहूर बाणगंगा नदी का उद्गम राजस्थान के जयपुर क्षेत्र के अरनसार और बैराठ पहाड़ियों से होता है। यह नदी यमुना की सहायक नदी गंभीर की सहायक नदी मानी जाती है। भारत में कई ऐसी नदियां हैं, जिन्हें हिन्दू धर्म के लोग पूजते हैं। बाणगंगा नदी उन्हीं नदियों में से एक है। इस नदी के तट पर हर साल बाणगंगा मेले का आयोजन किया जाता है।

इसके अलावा, इस नदी की एक और विशेषता यह भी है कि यह नदी केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से बहती हुई गुजरती है। यह भी माना जाता है कि 1527 में मुगल संस्थापक बाबर और मेवाड़ के शासक राणा सांगा के बीच जो युद्ध हुआ था, वह युद्ध इसी नदी के तट पर लड़ा गया था। वह युद्ध आज भी खानवा के युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है। 

बाणगंगा का बेसिन और उसकी सहायक नदियां

इस नदी का बेसिन अलवर, जयपुर, सवाई माधोपुर, दौसा और भरतपुर जिलों के लगभग 2500 कस्बों और गांवों में फैला हुआ है। बाणगंगा नदी की कई सहायक नदियां हैं, जिनमें गुमटी नाला, सूरी नदी, पलासन और सानवान नदी शामिल हैं। इस नदी पर जयपुर में जामवा रामगढ़ बांध भी बनाया गया है। ताला गांव से निकलने के कारण इस नदी को ताला नदी भी कहते हैं। इसके अलावा, इस नदी को कई जगहों पर रूणिडत नदी भी कहा जाता है।

बाणगंगा के आसपास के क्षेत्र में होने वाली कृषि

बाणगंगा नदी का जल स्तर बहुत कम हो गया है। जल स्तर कम होने के कारण इस नदी के आस-पास के क्षेत्र के जीव-जंतु पानी से वंचित हो रहे हैं और पानी की कमी से जूझ रहे हैं। पहले इस नदी का तट क्षेत्र खजूर की खेती के लिए मशहूर था। यहाँ काफी मात्रा में खजूर उपजाए जाते थे, किन्तु जल स्तर में कमी के कारण खजूर की खेती पर प्रभाव पड़ा है और खजूर की खेती में कमी आई है।

लगभग 30 साल पूर्व तक बाणगंगा नदी के मार्ग में पड़ने वाले जंगल काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र माने जाते थे, और साथ ही इस नदी के आसपास का क्षेत्र कृषि योग्य भूमि माना जाता था। किन्तु समय के साथ यहाँ की परिस्थितियों में बदलाव के कारण अब यहाँ बहुत कम भूमि कृषि योग्य और उपजाऊ रह गई है।

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