Sariska Tiger Reserve : सरिस्का टाइगर रिजर्व में बढ़ रहे बाघों की संख्या को देखते हुए वन विभाग को और अधिक जमीन की आवश्यकता पड़ रही है। दरअसल बीते कुछ वर्षों में बाघों के कुनबे में बढ़ोतरी देखने को मिली है और शावकों को धीरे-धीरे बढ़ रही है। यह वन जीव संरक्षण के दृष्टिकोण से एक बहुत ही अच्छी खबर है, लेकिन इसके कारण वन विभाग की परेशानियां बढ़ गई हैं।
क्यों चाहिए जमीन?
दरअसल बड़े हो रहे शावकों को जंगल में अपनी टेरिटरी बनाने के लिए हिस्सा चाहिए होता है। जिसके लिए वन विभाग को और अधिक जमीन की आवश्यकता है। हालांकि वन विभाग ने इसके लिए बहुत पहले से ही प्लैनिंग कर रखी थी लेकिन, इस प्लैनिंग को एग्जीक्यूट करने में देर हो रही है।
राजस्व विभाग पर है जिम्मेदारी
वन विभाग ने इसके लिए तैयारी बहुत पहले से ही कर ली गई थी। अब राजस्व विभाग को 690 हेक्टेयर की जमीन वन विभाग को सौंपना है। लेकिन यह कार्य अभी तक नहीं हो पाया है। इसी कारण सरिस्का के अधिकारियों की समस्याएं बढ़ गई हैं। क्योंकि अगर जल्द से जल्द जमीन वन विभाग को नहीं सौंपी गई तो शावक अपनी टेरिटरी की तलाश में जंगल से बाहर निकल सकते हैं। यह आम जन के लिए भी खतरा का विषय बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरिस्का में बसे 26 गांव को विस्थापित करने का प्लान तैयार करवाया गया था। जिसमें पहले चरण में 11 गांव को बसाना था। राजस्व विभाग द्वारा पांच गांवों को तो विस्थापित कर दिया गया लेकिन, बचे हुए 6 गांव अभी तक स्थापित नहीं हुए हैं। इन 6 गांव के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। आपको बता दें कि इन बाकी के 6 गांवों की जमीन करीब 450 वर्ग किलोमीटर है, जो अगर खाली हो जाते हैं तो टाइगर रिजर्व को फैलाने के लिए अच्छी खासी जगह मिल जाएगी। साथ ही साथ बाघों को अपनी टेरेटरी बनाने के लिए भी फिर बाहर नहीं भटकना पड़ेगा।
विस्थापन से हो जाएगा समस्या का सामाधन
विशेषज्ञ को मानना है कि इन 6 गांवों के विस्थापित होने से जो जगह खाली होगी वह जगह 45 बाघों के लिए पर्याप्त होगी। इसी वजह से इन गांवों को दूसरे जगह विस्थापित किया जाना था। इसके लिए प्रदेश सरकार ने राजस्व विभाग को प्रस्ताव भी भेजा था। लेकिन इस कार्य को अभी तक अनुमति नहीं मिली है। इसी विषय में सरिस्का के क्षेत्र निर्देशक संग्राम सिंह कटियार का कहना है कि इन गांवों के पुनर्वास के लिए जमीन देने का प्रस्ताव राजस्व विभाग के पास गया हुआ है। वहां से मंजूरी जैसे हीं मिल जाएगी तो इन गांवों को विस्थापित कर दिया जाएगा और इन गांव का भी पुनर्वास हो जाएगा।
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