Silent Treatment Impact: आज के समय माता-पिता को ये तो पता चल गया है कि बच्चों को मारने व डांटने से उनकी मानसिक स्थिति खराब होती है, इसलिए वो बच्चों को समझाने के लिए साइलेंट ट्रीटमेंट का उपयोग करते हैं और उनका मानना है कि इस तरह से समझाने से बच्चे जल्दी समझेगें लेकिन कई बार ये स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि इससे बच्चों के मानसिक स्थिति पर असर देखने को मिलता है।
मुख्यत: बच्चे अपने माता-पिता से इमोशनली जुड़े हुए होते हैं, जिसकी वजह से हर वो छोटी से छोटी चीज जो माता पिता अपने बच्चे को सामने करते है, वो इनको मानसिक तौर पर बहुत प्रभावित करती हैं। चाहे उनकी डांट हो या मार या फिर बात बात पर गुस्सा होकर बच्चों से बाते नहीं करना।
इस तरह के साइलेंट ट्रीटमेंट की वजह से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। इस वजह से साइलेंट ट्रीटमेंट के बजाय सभी माता-पिता को कुछ से तरीके अपनाने चाहिए जिससे बच्चे समझ भी जाएं और उन पर कोई खराब प्रभाव भी ना पड़े।
क्या है साइलेंट ट्रीटमेंट
प्रभावों के पहले सर्वप्रथम हमे जान लेना चाहिए की साइलेंट ट्रीटमेंट होता क्या है, क्योकि बहुत लोग असमंजस में पड़ जाते हैं कि ये होता क्या है, तो आइए जानते है। अक्सर अभिभावकों को लगता है कि वे बच्चों से बात नही करके उन्हें उनकी की गई गलती का अहसास करा सकते है, लेकिन सीधेतौर पर इसे एक प्रकार की अहिंसात्मक सजा कह सकते हैं।
सीधे शब्दों में समझे तो बिना कुछ कहे हे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। इसे तरह के ट्रीटमेंट के ज्यादातर घर के बड़े लोगों द्वारा अपने बच्चों को समझाने के लिए अपनाया जाता है। जिसे साइक्लोजी में साइलेंट ट्रीटमेंट कहते हैं।
साइलेंट ट्रीटमेंट का उपयोग क्यों
माता-पिता का मानना शारीरिक हिंसा या मौखिक हिंसा अर्थात् डांटने मारने का रास्ता नही चुनकर बल्कि गलती करने पर बच्चों से बात नहीं करने का रास्ते को चुनते है, क्योकि माता-पिता को लगता है कि कुछ भी ना बोलना ही बच्चे के लिए सही प्रतिक्रिया होगी। लेकिन समझाने का ये तरीका बच्चों को माता-पिता से दूर ले जाता है।
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क्या होता है असर
माता-पिता के द्वारा चुना गया रास्ता बच्चों को भावनात्मक रूप से कमजोर बना देता है, इसके लिए कई रिसर्च भी की गई है। जिसमें पता चला है कि माता-पिता बात बात पर बच्चे से नाराज होकर बात न करने की धमकी के कारण बच्चे अंदर ही अंदर एक खालीपन का शिकार होते रहते है। जिससे उनमें आत्मसम्मान तथा आत्मविश्वास की कमी, खुद के प्रति शंका पैदा हो रहती है और आने वाले समय में ये एक घातक परिणाम बनकर उभर सकती हैं।
इन तरीको से समझाएं बच्चों को
बच्चों को समझाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अगर कोई बच्चा कोई गलती करता है तो उसे समझाने का तरीका ये ना हो की आप उनसे नाराज हो जाओ बल्कि समस्या का समाधान बातचीत से भी निकाला जा सकता है क्योंकि इससे न केवल बच्चे आपकी बात अच्छे से समझ पाएंगे बल्कि आप भी अपनी बात को बच्चों के सामने एक बेहतरीन ढंग उस बात को समझा पाएंगे।
माता-पिता को चाहिए की वे बच्चों को समझाएं और अगर वे अगर उनकी बात नही मान रहे है तो उसके गहराई में जाकर पता लगाएं की क्यों वो उनकी बात को समझना नहीं चाहते, कहीं वो उनको कोई परेशानी तो नही है या फिर वे आपको बताने में डर रहे हो।
बच्चा अगर कोई गलती या किसी भी प्रकार का नुकसान करता है, तो माता-पिता को उसे की गई गलती का अहसास करवाए। ये समझाने का एक बेहतरीन तरीका हैं।
जिन कार्यक्रमों में गुस्सा व ऐसी चीजें दिखाई जा रही हो, जिसकी वजह से बच्चे को मानसिक स्थिति पर असर देखने को मिल रहा है। ऐसे कार्यक्रमों को देखने व सुनने से उसको रोके व ऐसे कार्यक्रमों को दिखाए जो उनके लिए अच्छे हों।
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