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Rajasthan Samudra Manthan: राजस्थान के जालौर जिले में उखरड़ा गांव है, जहां समुंद्र मंथन की परंपरा होती है। इस परंपरा में तालाब भूमि पूजन की रश्म के दौरान भाई अपनी बहनों को चुनरी ओढ़ाते हैं।

Samudra Manthan: राजस्थान जो परंपराओ से भरा राज्य है, जहां हर जगह की अपनी अलगक परंपरा देखने और जानने को मिलती है। इन परंपराओं का भी अपना एक इतिहास और महत्व है, जो राजस्थान की संस्कृति को दर्शाता है।

समुंद्र मंथन आयोजन

राजस्थान की अनोखी परंपराओ में एक ऐसी परंपरा है, जहां समुंद्र मंथन की तैयारी की जाती है। यह कई सालों से चली आ रही है, जिसे लोग आज भी उसी भावना से मनाते हैं। 

जालौर जिले का उखरड़ा गांव

ये समुंद्र मंथन परंपरा जालौर जिले के उखरड़ा गांव में की जाती है। इस गांव में हरियाली से भरी पहाड़ियां है, जो अपने मोहक दर्श्य से किसी को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। इस गांव में एक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसमें तालाब भूमि पूजन की रश्म निभाई जाती है। 

समुंद्र मथंन की कथा 

पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन देवताओं द्वारा धन, वैभव और  ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए किया गया था। जिसमें 14 रत्न के साथ अमृत भी उत्पन्न हुआ था। समुंद्र मथंन की ये परंपरा उखरड़ा गांव में भी धन, वैभव और  ऐश्वर्य की मनोकामना के लिए की जाती है। 

भूमि पूजन का विधिवत शुभारंभ

जालौर के उखरड़ा गांव में एक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसे समुंद्र मंथन के नाम से जाना जाता है। इस रश्म को करने से पहले शुभ मुहूर्त निकाला जाता है, उसके बाद तालाब में विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना कर मिट्टी डालने के कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया जाता है। 

छत्तीस कौम की महिलाएं होती है शामिल

इस कार्यक्रम में गांव की छत्तीस कौम की महिलाएं शामिल होती है और तालाब भूमि पूजन करते समय सभी महिलाओं द्वारा समुद्र मंथन के गीत गाए जाते हैं, जो इस तालाब भूमि पूजन को ओर ज्यादा रोचक बना देती हैं। इसमें महिलाएं तालाब की मिट्टी खोदती है और तालाब की कच्ची दीवार में मिट्टी डालकर इस परंपरा को निभाती हैं। 

पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित महिलाओं की परंपरा 

समुंद्र मंथन की परंपरा में सभी महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर तैयार होती है और फिर  ढोल व थाली की झनकार पर नृत्य करते हुए गांव के तालाब पर पहुंचती हैं। 

भाई-बहन की अनोखी रश्म

तालाब भूमि पूजन के बाद एक रश्म ओर होती है, जिसमें भाई-बहन आपस में एक-दूसरे को पानी पिलाते हैं। पानी पिलाने के बाद भाई अपनी बहनों को चुनरी ओढ़ाकर इस रश्म को पूरा करते हैं।

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