Banswara MP Rajkumar Roat met PM Modi: राजस्थान के बांसवाड़ा से सांसद राजकुमार रोत ने पीएम नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण मुलाकात की है। जानकारी के अनुसार यह मुलाकात राजस्थान तथा गुजरात के मध्य हुए दशकों पुराने एक समझौते को लेकर की गई है। डूंगरपुर-बांसवाड़ा संसदीय क्षेत्र लंबे समय से सूखाग्रस्त होने के कारण सिंचाई तथा पेयजल की समस्या से जूझ रहा है। जिसके लिए 10 जनवरी 1966 को दोनों राज्यों के मध्य माडी व कडाना बांध को लेकर एक समझौता हुआ था। उन्हीं परियोजनाओं की स्वीकृति के संबंध में पीएम मोदी से मुलाकात की है।
आदिवासी क्षेत्रों के विकास को लेकर चर्चा
सांसद राजकुमार रोत के द्वारा यह मुलाकात प्रधानमंत्री कार्यालय के लोकसभा भवन पर की गई है। पीएम मोदी से इस मुलाकात के दौरान सांसद रोत ने आदिवासी बहुल क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को लेकर जनहित से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगों पर चर्चा की। इन मांगों के केंद्र में भील प्रदेश के गठन को प्रमुख रूप से रखा गया है। इसके साथ ही शिक्षा,स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार तथा आदिवासी क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने को कहा गया है। मुलाकात के बाद सांसद रोत ने बाहर आकर बताया कि पीएम मोदी ने सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।
17 सूत्री मांगों का पत्र सौंपा
सांसद राजकुमार रोत ने अपने पत्र में 17 सूत्रीय मांगों का बिंदुवत कुछ इस प्रकार दिया-
1.राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा मध्यप्रदेश के कुछ भागों को मिलाकर एक भीलप्रदेश का गठन किया जाए।
2.1966 के माही-कडाना बांध के समझौते की शर्तों को पूरा कर बांसवाड़ा-डूंगरपुर संसदीय क्षेत्र की पेयजल तथा सिंचाई की समस्या को दूर करें।
3.बजट सत्र 2022 में 84 विधानसभा क्षेत्रों हेतु स्वीकृत किए गए 886 करोड़ रुपएकी कडाना से गैंजी घाटा तक पेयजल परियोजना का वर्क ऑर्डर जारी करें।
4.डूंगरपुर में एक अतिरिक्त नवीनतम नवोदय विद्यालय खोला जाए।
5.गुजरात में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के उपचार के लिए प्रवासी मजदूर चिकित्सायोजना लागू करें।
6.यूएन द्वारा घोषित 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर राजकीय अवकाश घोषित किया जाए।
7.गुजरात में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों केबच्चों हेतु प्रवासी शिक्षा केंद्र खोले जाएं।
8.बांसवाड़ा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा बिजलीघर पररोक लगाई जाए।
9.अनुसूचित क्षेत्रों में उच्चतम न्यायालय के समता जजमेंट 1997 का अनुपालन कराया जाए, साथ ही स्थानीय जनजातियों को खनन में सोसाइटी बनाकर मालिकाना अधिकार दिए जाएं।
10.भगवान बिरसा मुंडा, मामा बालेश्वर तथा टांट्या मामा भील को मरणोपरांत भारत रत्नदिया जाए।
11.बांसवाड़ा में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए एक छात्रावास खोला जाए।
12.बांसवाड़ा में एक खेल विश्वविद्यालय खोला जाए।
13.बांसवाड़ा संसदीय क्षेत्र में आईआईटी, नीट तथा आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेशहेतु छात्रों के लिए एक उच्च स्तरीय कोचिंग सेंटर खोला जाए।
14.कौशल दक्षता योजना के तहत एक स्किल डेवलपमेंट कॉलेज खोला जाए।
15.राजस्थानके आदिवासी बहुल क्षेत्र में एक एम्स खोला जाए।
16.जंगली जानवरों के द्वारा होने वाली हत्याओं तथा उससे आदिवासियों के होने वाले विस्थापन को लेकर टाइगर प्रोजेक्टों को रोकने की मांग की है।
17.बांसवाड़ा-डूंगरपुरजिले से सभी पीएम सहायता निधि के लिए किए गए आवेदनों को स्वीकृति प्रदान कर वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाए।