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राजस्थान सरकार के द्वारा सरसों तथा चने की उपज को खरीदने के लिए 1 अप्रैल 2025 से ऑनलाइन पंजीयन कार्य शुरू होगा। नोडल एजेंसी द्वारा उपज की क्रय 10 अप्रैल से शुरू कर दी जाएगी।

Online Registration will Start from 1 April in Rajasthan: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य के किसानों से सरसों और चने की उपज खरीदी करने की तैयारियों को शुरू कर दिया है। राजस्थान सरकार के द्वारा उपरोक्त उपज को खरीदने के लिए 1 अप्रैल 2025 से ऑनलाइन पंजीयन कार्य शुरू हो जाएगा।  उपज का क्रय 10 अप्रैल से शुरू कर दी जाएगी। जानकारी के अनुसार राज्य में सरसों और चने की क्रमशः 13.89 तथा 6.30 लाख मीट्रिक टन खरीद किया जाना प्रस्तावित किया गया है। जबकि राज्य में सरसों एवं चने का क्रमशः 62 लाख मीट्रिक टन तथा 23 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है।

ई-मित्र के माध्यम से होगा पंजीयन

राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक के अनुसार राज्य के किसान ई-मित्र के माध्यम से सरसों एवं चने की उपज के विक्रय हेतु पंजीयन करवा सकते हैं। पंजीयन कराते समय किसानों को गिरदावरी तथा पासबुक फॉर्म के साथ अपलोड करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस बार उपज खरीदी करने के लिए नोडल ऐजेंसी के तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) तथा भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारिता संघ (एनसीएफएफ) को जिम्मेदारी दी गई है। खरीद बायोमेट्रिक अभिप्रमाणन के आधार पर की जाएगी। बता दें राज्य में कुल 505- 505 क्रय केंद्रों में से सरसों तथा चने की खरीद हेतु इस बार एनसीएफएफ को 217-217 तथा नेफेड को 288-288 क्रय केंद्रों की स्वीकृति दी गई है।

इस दर पर होगी उपज की खरीदी

राज्य के किसान क्षेत्र में क्रय-विक्रय केंद्र अथवा ग्राम सेवा सहकारी समिति केंद्र पर जाकर उपज का विक्रय कर सकते हैं। राजस्थान सरकार के द्वारा सरसों तथा चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। इस बार सरसों का एमएसपी 5950 रुपए प्रति क्विंटल तथा चने का एमएसपी 5650 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

किसानों की सुविधा हेतु कॉल सेंटर की स्थापना

सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक के अनुसार राजस्थान राज्य सहकारी क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड(राजफैड) के क्षेत्रीय कार्यालय में कॉल सेंटर स्थापित किया गया है। इसके लिए एक टोल फ्री नंबर 18001806001 को सक्रिय किया गया है। किसानों को विशेष सलाह दी गई है कि वे अपनी फसल को साफ-सुथरा तथा छानकर ही क्रय केंद्रों पर लेकर पहुंचें। ताकि उनकी फसल को उच्च गुणवत्ता मानदंडों के अनुरूप क्रय कर सकें।

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