Rajasthan Politics: राजस्थान की राजनीति में एक और घटिया खेल शुरू हो गया है। इस बार मुकाबले में अशोक गहलोत हैं, जिनकी नाकामी, भ्रष्टाचार और झूठ का चक्रव्यूह अब सामने आ चुका है। ये वही गहलोत हैं, जिन्होंने अपनी सरकार में किस-किस घोटाले को अंजाम नहीं दिया, और आज वही नसीहत दे रहे हैं। क्या यह वही गहलोत नहीं हैं जिनकी सरकार में राजस्थान ने घोटालों का ऐसा तूफान देखा था कि आज तक उसे ठीक नहीं किया जा सका? और अब ये दूसरों को नकारा बता रहे हैं।
अशोक गहलोत की सरकार, जो खुद भ्रष्टाचार और घोटालों की एक बड़ी मिसाल बन चुकी है, आज वही गहलोत भाजपा की सरकार को नकारा और निकम्मा बता रहे हैं। कांग्रेस की ही सरकार में राजस्थान की जनता ने कितने घोटाले देखे, और आज ये अपनी नाकामी को छुपाकर दूसरों को शिक्षा दे रहे हैं।
गहलोत ने उठाए सवाल
"गहलोत ने कहा कि इस सरकार की उपलब्धि सिर्फ 9 जिलों का खत्म करना है। लेकिन फिर सवाल ये उठता है जब गहलोत के मंत्री के नाम बड़े घोटालों में आए, तब इन्होने कभी अपनी सरकार की जिम्मेदारी नहीं ली और अब इनको यही याद आया कि 9 जिले बंद कर दिए गए। गहलोत ने कहा कि 'कांग्रेस ने जनता की मांग पर नए जिले बनाए थे', तो क्या ये आपके लिए 'जनता की मांग' नहीं थी। जब आप इतने सालों तक राजस्थान में भ्रष्टाचार फैला रहे थे? क्या आपने कभी जनता के लिए कोई ठोस कदम उठाया?
आप कहते हैं कि इस सरकार ने कोई काम नहीं किया, तो क्या आपने अपनी सरकार में कभी काम किया था। यह वही गहलोत हैं, जिनकी सरकार में जनता के पैसे से खेले गए घोटाले, फर्जी स्कीम्स, और भ्रष्टाचार की लकीरें छोड़ दी गईं। क्या आपको ये सब भूल गए हैं। जब आपके राज में पब्लिक फंड्स की लूट हुई, तो क्या आपको जनता के बारे में नहीं सोचना चाहिए था। क्या आपको खुद पर एक भी सवाल नहीं उठाना चाहिए?"
अशोक गहलोत ने कहा दूसरी सरकार को निक्कमा
अशोक गहलोत ने जिस मुंह से दूसरों को निकम्मा बता रहे हैं, वही मुंह कभी अपने घोटालों पर क्यों नहीं बोला? क्यों कभी आपने अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार के बारे में नहीं सोचा? आप सबको दोषी ठहराने में माहिर हैं, लेकिन अपनी गलती कभी नहीं मानते! आपको यह समझना चाहिए कि राजनीति का मतलब जनता की सेवा होता है, न कि अपनी कुर्सी बचाने के लिए हर बार किसी और पर आरोप लगाना।