Women Leader of Rajasthan: अंजना देवी चौधरी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाली एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी रामनारायण चौधरी की धर्मपत्नी थीं। इनका जन्म सीकर जिले के श्रीमाधोपुर में हुआ था। अंजना देवी चौधरी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक कार्यकर्ता के साथ-साथ एक लेखिका भी थीं।
वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गिरफ्तार होने वाली राजस्थान की पहली महिला थीं। अपने पति राम नारायण चौधरी से उन्होंने राजनीति और स्वयंसेवी कार्यों के बारे में काफी कुछ सीखा। 1930 के नमक सत्याग्रह के दौरान वह 6 माह के लिए कारावास में भी रहीं।
महिलाओं की अगुआई और बूंदी से निर्वासन
उन्होंने 1920-30 के बीच मेवाड़ और बूंदी के क्षेत्र में महिलाओं को राजनीतिक चेतना के लिए जागृत करने के कई कार्य किए। उन्होंने समाज सुधार और सत्याग्रह पर भी काम किया, जिस कारण उन्हें गिरफ्तार करके बूंदी राज्य से निर्वासित करवा दिया गया था। बिजोलिया में 500 महिलाओं के जुलूस का नेतृत्व करते हुए उन्होंने अपनी गिरफ्तारी दी और तत्पश्चात जो किसान गिरफ्तार हुए थे, उन्हें रिहा करवाया। 1934 से 36 तक उन्होंने अजमेर के नरौली आश्रम में रहकर हरिजन सेवा कार्यों में भी भाग लिया।
सेवाग्राम आश्रम में योगदान
1939 में महात्मा गांधी के सेवाग्राम आश्रम में वहां के कार्यों में उन्होंने काफी सहयोग दिया और इसके साथ-साथ भारतीय सेवक समाज के महिला सूचना केंद्र में भी अपना योगदान दिया। बिजोलिया और बूंदी किसान आंदोलन के दौरान इन्होंने महिलाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ उन महिलाओं का नेतृत्व भी इस आंदोलन के लिए किया। स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान उन्होंने अपने पति के कंधे से कंधा मिलाकर उनका पूर्ण साथ दिया और जीवन पर्यंत जन सेवा और राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य करती रहीं।
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