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Prithviraj Chauhan: राजस्थान के पृथ्वीराज चौहान महान योद्भा के रूप में जाना जाता है, इतिहास में इनके और संयोगिता की प्रेम कहानी की निशानी कन्नोज का भव्य स्वयंवर हैं।

पृथ्वीराज चौहान को हम सब एक वीर योद्धा के रूप में जानते है। आज भी राजस्थान के गलियारों में उनकी वीर गाथाएं गूंजती हैं। इसी कारण से पृथ्वीराज चौहान का नाम हमारे देश के इतिहास में चर्चित हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि पृथ्वीराज चौहान एक योद्धा होने के साथ साथ एक प्रेमी भी थे। राजस्थान के बयाना में स्थित ऐतिहासिक बारहदरी नामक इमारत आज भी उनकी प्रेम कहानी की गवाही देती है।  

पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेम कहानी  

कन्नौज के प्रतापी राजा जयचंद की पुत्री संयोगिता की सुंदरता और बुद्धिमत्ता के चर्चे पूरी दुनिया में थे। राजा जयचंद के शत्रु पृथ्वीराज चौहान दुल्ली के पराक्रमी शासक थे। कहा जाता है कि एक बार एक चित्रकार ने रानी संयोगिता के सामने कई राजाओं व राजकुमारियों के चित्र बनाए थे। इन चित्रों में पृथ्वीराज चौहान का चित्र देखकर संयोगिता मोहित हो गई थी। वही जब  पृथ्वीराज ने संयोगिता का चित्र देखा तो उन्हें रानी संयोगिता से प्यार हो गया। 

स्वयंवर के बीच से भगा ले आए पृथ्वीराज

संयोगिता की शादी के लिए कन्नौज में भव्य स्वयंवर आयोजित किया था। लेकिन जयचंद ने अपनी शत्रुता के चलते पृथ्वीराज को स्वयंवर का निमंत्रिण नहीं दिया था। इतना ही नहीं जयचंद ने पृथ्वीराज के अपमान में भवन के द्वार पर उनकी एक प्रतिमा द्वारपाल की तरह लगवाई थी।

स्वयंवर वाले दिन संयोगिता ने दूर-दूर से आए राजाओं को अनदेखा कर सीधे पृथ्वीराज की प्रतिमा पर जयमाला डाल दी। इसे देखकर जयचंद क्रोधित हो गए। वहीं पृथ्वीराज ने पहले से ही अपनी योजना तैयार कर रखी थी, वे तेजी से स्वयंवर सभा में आए और अपनी प्रेमिका संयोगिता को घोड़े पर बिठाकर कर ले आए थे। 

बयाना की यह इमारत है प्रेम की निशानी 

सैनिकों की सुरक्षा के बीच पृथ्वीराज और संयोगिता बयाना प्राचीन श्रीप्रस्थ पहुंच गए। भरतपुर के बयाना के पास स्थित हिण्डौन मार्ग पर मौजूद ऐतिहासिक बारहदरी नामक इमारत आज भी उनके प्रेम की निशानी मानी जाती है।

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