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Rajasthan History: राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन यह शुरुआत से ऐसा नहीं था। छोटे-छोटे रियासतों को जोड़कर और 8 साल की लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बाद आज के राजस्थान का निर्माण हुआ।

Rajasthan History: राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन यह हमेशा से ही इतना बड़ा राज्य नहीं था। राजस्थान को देश का सबसे बड़ा राज्य बनने के लिए कई कानूनी प्रक्रियाओं और चरणों से होकर गुजरना पड़ा। आइए जानते हैं राजस्थान के बनने की कहानी कि कैसे समय के साथ-साथ राजस्थान का एकीकरण किया गया और कैसे भारत को उसका सबसे बड़ा राज्य मिला।

राजस्थान का इतिहास राजा-रजवाड़ों का इतिहास रहा है। यहां पहले कई छोटी-छोटी रियासतें हुआ करती थीं। राजस्थान राज्य को एकीकृत करने के लिए समय के साथ अलग-अलग चरणों में अलग-अलग रियासतों को एक साथ जोड़ा गया। सालों की कोशिशों और सात चरणों से गुजरने के बाद यह राज्य आज का राजस्थान बना।

पहला चरण: मत्स्य संघ

पहले चरण में 18 मार्च 1948 को अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर एवं नीमराना को एकीकृत करते हुए मत्स्य संघ की स्थापना हुई।

दूसरा चरण: पूर्वी राजस्थान

दूसरे चरण में 25 मार्च 1948 को कोटा, बूंदी, झलवाड़, किशनगढ़, शाहपुरा, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, कुशलगढ़ और टोंक को एकीकृत करते हुए पूर्वी राजस्थान की स्थापना की गई।

तीसरा चरण: संयुक्त राजस्थान

तीसरे चरण में पूर्वी राजस्थान में उदयपुर की रियासत को शामिल किया गया। तीसरे चरण का यह एकीकरण 18 अप्रैल 1948 को किया गया।

चौथा चरण: वृहत राजस्थान

चौथे चरण में संयुक्त राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर जैसी रियासतों को शामिल किया गया। यह एकीकरण 30 मार्च 1949 को संपन्न हुआ।

पांचवां चरण: संयुक्त वृहत राजस्थान

पांचवें चरण में 15 मई 1949 को वृहत राजस्थान में मत्स्य संघ को शामिल कर दिया गया।

छठा चरण: राजस्थान संघ

26 जनवरी 1950 को सिरोही क्षेत्र का वृहत राजस्थान में विलय कर दिया गया।

सातवां चरण: नवीन राजस्थान

सातवें चरण का एकीकरण 1 नवंबर 1956 को संपन्न हुआ। इसमें आबू और देवलवाड़ा को राजस्थान संघ से जोड़ने के साथ-साथ मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा तहसील का सुनेल टप्पा राजस्थान में शामिल किया गया। इसके बदले मध्य प्रदेश राज्य को सिरोंज उपखंड दिया गया।

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