Maharaja Suraj Mal: जाटों के महान योद्धा जिसने भरतपुर में एक नए राज्य का निर्माण किया, जिनका नाम महाराजा सूरजमल था। सूरजमल ने कम आयु में ही मेवात पर कब्जा कर लिया था। 1732 में ही पिता के आदेश पर दिल्ली के शो ग्रहों पर आक्रमण करके एक बड़े इलाके को जीत लिया। इस विराट विजय के बाद सूरजमल ने भरतपुर में लोहागढ़ किले का निर्माण के बाद अपना राज्याभिषेक करवाया था, इन्होने दिल्ली के बादशाह को एक महीने तक दिल्ली में कैद कर दिया था।
अफलातून नाम से मशहूर सूरजमल
अफलातून के नाम से मशहूर सूरजमल ने मुगल खजाने को अपने कब्जे में ले लिया और ये ब्रज के पहले ऐसे शासक थे, जिन्होने मुगलों से अपनी शर्त मानने पर मजबूर कर दिया था। दोनों हाथों में तलवार लेकर अपने दुश्मन पर काल बनकर टूट पड़ते थे। ये ब्रज के हिंदुओं के गुमान और 80 युद्धों के विजेता थे, जिनको अजय योद्धा कहा जाता था।
सूरजमल की मुगलों को मिटाने की कसम
सूरजमल ने राज्य का विस्तार करने के लिए भयानक युद्ध का शंखनाद किया था, जिसमें ब्रज भूमि से मुगलों का अस्तित्व मिटाने की कसम खाई थी। जल्द ही महाराजा सूरजमल ने रेवाड़ी, नीमराना, मथुरा, मेवात और गुरुग्राम को फतह करके अपने राज्य की सीमाओं को दिल्ली के दरवाजे तक मजबूत कर लिया।
1553 में महाराजा सूरजमल ने दिल्ली पर चढ़ाई कर दी और दिल्ली के नवाब गजीउद्दीन की सेना पर प्रचंड आधी की तरह टूट पड़े। सूरजमल के प्रकोप से बचने के लिए गाजिउद्दीन युद्ध का मैदान छोड़कर भाग गया, सूरजमल ब्रज की पवित्र धारा से मुगलों पर प्रकोप बना चुके थे।
महाराजा सूरजमल की वीरगति
दिल्ली के सरदार नाजीबुद्दौला ने सूरजमल की सीमाओं को मानने से इनकार कर दिया था। इसी के चलते महाराजा सूरजमल ने एक बार फिर दिल्ली पर आक्रमण कर दिया। महाराजा सूरजमल केवल 38 घुड़सवारों के साथ शहर का द्वार तोड़कर विशाल सेना के बीच जा भिड़े, जहां पर वे लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
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