Rajasthan History: आज के समय में भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन प्राचीन इतिहास में ऐसा नहीं था। भारत में पहले राजा-महाराजाओं का शासन हुआ करता था, लेकिन भारत में राजतंत्र होने के बावजूद भी यहां कभी निरंकुश शासन नहीं रहा, खासकर राजस्थान के राजपूत शासकों के शासनकाल में। हमेशा ही जनता की आवाज सुनी गई। राजस्थान के वीर शासकों ने जनता के दिल में अपनी अलग पहचान बनाई। इस लेख में हम बात करेंगे राजस्थान के इतिहास में घटी एक ऐसी घटना की, जब राजतंत्र होने के बावजूद जनता ने लोकमत से अपना शासन चुना था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह बात है 1575 ई. की, उस समय राजस्थान के उदयपुर, जो उस समय मेवाड़ कहलाता था, पर अकबर ने आक्रमण कर दिया था। उदयपुर की सेना दिन-रात अकबर से लड़ रही थी। इसी बीच उदयपुर के महाराज उदय सिंह की मृत्यु हो गई। उदय सिंह की मृत्यु के बाद जनता की इच्छा थी कि महाराणा प्रताप उदय सिंह जी की राजगद्दी संभाली, लेकिन उदय सिंह ने अमृत सैया पर लेटे हुए अपने छोटे बेटे जगमाल को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
जनता ने महाराणा प्रताप को बताया अपना शासक
उस समय राजस्थान में यह प्रथा हुआ करती थी कि जो भी व्यक्ति राजा का अगला उत्तराधिकारी बनेगा, वह राजा के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में भाग नहीं लेता था। इसके पीछे कई कारण हुआ करते थे, जिनमें सबसे प्रमुख कारण यह बताया जाता था कि राजा को किसी भी प्रकार के मोह-माया से दूर होना चाहिए। इसी वजह से किसी भी उत्तराधिकारी को उसके पिता के अंतिम संस्कार में उपस्थित होने की अनुमति नहीं होती थी।
लेकिन जब उदय सिंह जी का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तो वहां महाराणा प्रताप उपस्थित थे। ऐसे में जनता के बीच यह चर्चा होने लगी कि क्या महाराणा प्रताप शासक नहीं बनेंगे? जब लोगों ने यह आवाज उठाई, तो महाराणा प्रताप ने अपने पिता की अंतिम इच्छा के रूप में जगमाल को शासन बनाए जाने की घोषणा के बारे में बताया। जनता ने जैसे ही यह सुना, उन्होंने विद्रोह कर दिया।
सलूंबर के सावंत ने किया तिलक
जनता चाहती थी कि महाराणा प्रताप उनके शासक बनें, लेकिन जब जनता को पता चला कि महाराणा प्रताप की जगह जगमाल को मेवाड़ का राजा घोषित किया जा रहा है, तो जनता ने इसके लिए खुलकर आवाज उठाई। श्मशान घाट में राजस्थान के सलूंबर क्षेत्र के सावंत कृष्णदास चुंडावत मौजूद थे। मेवाड़ में यह परंपरा चली आ रही थी कि मेवाड़ के राजा का तिलक सलूंबर का सावंत करेगा।
ऐसे में वह सामने आए और उन्होंने महाराज की घोषणा को काटते हुए महाराणा प्रताप को मेवाड़ का अगला शासक घोषित किया। अंतिम संस्कार की क्रिया पूरी होने के बाद जगमाल की जगह महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक हुआ और वह राजा बने। राजतंत्र के इतिहास में यह पहली बार था जब जनता ने अपने पसंद के शासक का चुनाव किया था।