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Rajasthan History: इतिहास गवाह है कि राजस्थान के राजपूत हमेशा सिर उठाकर जीने में विश्वास रखते आए हैं। इसी वजह से जब भी उन पर कोई समस्या आई, उन्होंने सिर झुकाने के बजाय सिर कटाना स्वीकार किया।

Rajasthan History: जब भी राजपूतों के इतिहास की बात होती है, तो इस बात का जिक्र जरूर होता है कि उनके आत्मसम्मान और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसका जिक्र हो भी क्यों न हो, राजपूतों ने एक बार नहीं, बल्कि कई बार यह सिद्ध किया कि उनके अंदर देशप्रेम और जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। राजपूतों के इसी जज्बे का प्रतीक होता था साका।

राजस्थान पर आक्रमण

राजस्थान के इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है कि बाहरी आक्रमणकारियों ने राजस्थान पर आक्रमण किया। खासकर दिल्ली सल्तनत की स्थापना के बाद राजस्थान पर होने वाले आक्रमणों की संख्या कई गुना बढ़ गई। राजस्थान भारत का उत्तर-पश्चिमी राज्य है, इस वजह से पश्चिम की ओर से जो भी आक्रमण हुए, उनमें राजस्थान को सुलगना पड़ा। 

यह बंद हो गया, लेकिन राजस्थान उस समय छोटे-छोटे रियासतों में बंटा हुआ था। ऐसे में किसी भी रियासत के पास उतनी सैन्य शक्ति नहीं थी, जितनी दिल्ली सल्तनत और पश्चिमी आक्रमणकारियों के पास थी।

क्या होता था साका?

ऐसे में जब हर ओर से राजाओं के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता था, तब वे साका का विकल्प चुनते थे। साका दो चरणों में पूरा होता था। पहले चरण में महल की रानियां और दासियां मिलकर अपने आप को जौहर की अग्नि में समर्पित करने का निर्णय करती थीं। ऐसे में पुरुषों के पास किसी बात का डर नहीं होता था कि उनके बाद उनके परिवार और उनके घर की स्त्रियों का क्या होगा, और वे बेखौफ होकर लड़ने निकल जाते थे।

10-10 पर एक सैनिक पड़ता था भारी

महिलाएं जोहर की अग्नि में कूद कर आत्महत्या कर लेती थीं और महल के सारे पुरुष रात भर उन्हें जलते हुए देखते थे। अपने सामने अपना परिवार गुजरते हुए देखकर उनके भीतर और गुस्सा जागृत हो जाता था, जिसके बाद वे चिता की भस्म को अपने शरीर पर लपेटकर और अफीम की गोलियां खाकर युद्ध करने निकल जाते थे।

इस समय उन राजपूत योद्धाओं की नजरों में देखने पर शत्रु को ऐसा लगता था कि वे कोई इंसान नहीं, बल्कि भूखे शेर को शिकार करते हुए देख रहे हैं। एक-एक राजपूत योद्धा 10-10 शत्रुओं पर भारी पड़ता था। रणभूमि में उस समय मौत का तांडव देखा जाता था और इसके बाद वे लड़ते-लड़ते अपने प्राणों की बलि दे दिया करते थे।

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