Laxmangarh Fort Sikar: राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां के हजारों किले अपने इतिहास और अनोखे रहस्य की वजह से मशहूर है। इन्हीं किलों में से एक है सीकर जिले का लक्ष्मणगढ़ किला जो अपने इतिहास और बनावट के लिए बेहद जाना जाता है। इस किले को बनाने के पीछे एक कथा है, लेकिन इस किले की खास बात यह है कि राजा के द्वारा बनाने के बावजूद आखिर ऐसा क्या हुआ जिसके कारण राजा को यह किला बेचना पड़ा? आज इस लेख में हम आपको सीकर में स्थित लक्ष्मणगढ़ किले से जुड़ी सभी जानकारी बताएंगे।
लक्ष्मणगढ़ किले का इतिहास
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित लक्ष्मणगढ़ किला राव राजा लक्ष्मण सिंह द्वारा 19वीं शताब्दी में बनवाया गया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह किला पहले एक गांव हुआ करता था, जिसका नाम बेर था। राजा लक्ष्मण सिंह एक बार फतेहपुर से लौटते समय इसी गांव में आराम कर रहे थे तभी अचानक उन्होंने भेड़िये को मेमने पर हमला करते हुए देख लिया था। इसके बाद राजा ने भेड़ियो को नवजात मेमने से अलग करवाया और इसी घटना के बाद राजा ने इस किले का निर्माण करवाने का आदेश दिया।
23 मीनार वाला लक्ष्मणगढ़ किला
आपको बता दें कि लक्ष्मणगढ़ किले 300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस किले का निर्माण खास पत्थरों से किया गया है जिन्हें छेनी या हथौड़े से आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता है। इस किले के अंदर 23 मीनारें है और एक 25 फीट का पानी का टैंक बना हुआ है। इस किले के दरवाजें गोमुख शैली में बनाएं गए है। इस किले पर जाने से पहले आपको 23 सीढ़िया चढ़नी पड़ेंगी जिसके बाद ही किले का दरवाजा आता है जिसे सिंह द्वार भी कहते हैं। सिंह द्वार के 47 सीढ़ियों के बाद ही किला शुरू होता है।
मजबूरी में पड़ा था बेचना
इस किले को राजा लक्ष्मण सिंह ने कभी रहने के लिए बनाया था, बल्कि अपनी शान के लिए ही इसका निर्माण किया गया था। देश की आजादी के बाद राव राजा कल्याण सिंह की आय बंद हो गई थी और उन्हें सरकार की ओर से केवल पेंशन दी जा रही थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सारी संपत्तियां बेचना शुरू कर दिया था। उन्होंने साल 1960 में इस किले को झुनझुनवाला को बेच दिया था।