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Mandalgarh Fort: राजस्थान के प्रमुख किलों में से एक है भिलवाड़ा जिले का मांडलगढ़ किला। माना जाता है कि यह वही किला है, जिसमें अकबर की सेना ने एक माह तक हल्दीघाटी युद्ध की तैयारी की थी।

Mandalgarh Fort: मांडलगढ़ किला राजस्थान के भिलवाड़ा जिले में मौजूद एक पहाड़ी पर बना हुआ है। वीर विनोद ग्रंथ के मुताबिक अजमेर के चौहान शासकों इस किले का निर्माण कराया था। यहां आपको किले के अलावा जैन तीर्थंकर ऋषभदेव का एक जैन मंदिर और जलेश्वर के शिवालय भी देखने को मिल जाएंगे। 

मांडलगढ़ के किले का इतिहास

मुगल शासकों ने इस किले को मेवाड़ में आने जाने के लिए अपना केंद्र बनाया था। इतिहासकारों के मुताबिक 1576 ई में हल्दीघाटी युद्ध से पहले अकबर के सेनापति मानसिंह ने करीब 1 महीने के लिए मांडलगढ़ में रूककर अपनी सेना को तैयार किया था। बाद में महाराजा राजसिंह द्वारा इस किले को मुगलों के हाथों से छीन लिया गया था। 

किले से जुड़ी कथा 

एक कथा के मुताबिक एक मांडिया भील नामक व्यक्ति था, जो पशु चराने का कार्य किया करता था। एक बार पशु चराते समय उसे एक पारस का पत्थर मिला था, जैसे ही उसने पत्थर को घिसा वह सोने में तब्दील हो गया। इसके बाद उसने पत्थर की बात अपने दोस्त चरवाहे को बताई तो उसने इस चमत्कारी पत्थर को अपने दोस्त से ले लिया। कुछ सालों में ही चरवाहे के पास बहुत सारा पैसा हो गया, जिससे उसने एक किले का निर्माण कराया जिसका नाम उसने अपने दोस्त के नाम पर रखा मांडलगढ़। 

मेवाड़ पर हमले करने के लिए किले को बनाया था केंद्र

1567 ई. में मुगल शासक अकबर ने मांडलगढ़ के राजा बालानोत सोलंकी को युद्ध में हराकर किले को अपने कब्जे में कर लिया था। मेवाड़ पर हमला करने के लिए अकबर ने इस किले को अपनी सेना का ठिकाना बनाया था। वर्ष 1576 में हुए हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की सेना का नेतत्व कर रहे सेनापति मानसिंह ने किले में एक माह बिताया था। इस दौरान सेना को युद्ध के लिए तैयार किया गया था।

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