Rajasthan 7 Famous Wonders: राजस्थान भारत का एक ऐसा राज्य है जो अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। यह राज्य अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए देश और विदेश मे पहचाना जाता है आज हम राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध अजूबे के बारे में बताएंगे।
1. चित्तौड़गढ़ किला
इस किले की वजह से राजस्थान की पहचान दुनिया भर में है। यह किला राजस्थान के सात अजूबों में पहले स्थान पर है। चित्तौड़गढ़ किले के बारे में कहां भी जाता है की गढ़, तो चित्तौड़गढ़ बाकी तो सब गढियां हैं। यह दुर्ग भारत का सबसे बड़ा और प्राचीनतम दुर्ग है। इस दुर्ग को 21 जून 2013 में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल में शामिल किया गया था। इतिहासकारों का मानना है कि इस दुर्ग का निर्माण 7वीं शताब्दी में मौर्य शासक चित्रांगद मौर्य ने करवाया था। इस दुर्ग के परिसर में 65 ऐतिहासिक संरचना है। जिसमें 19 मुख्य मंदिर, चार महल परिसर, चार ऐतिहासिक स्मारक और करीब 20 जल निकाय हैं।
2. कुंभलगढ़ किला
यह दुर्ग राजस्थान का दूसरा अजूबा है। यह किला राजसमंद शहर में उदयपुर शहर से 82 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। अपने चीन की सबसे बड़ी दीवार के बारे में तो सुना ही होगा। इस किले के चारों ओर भी दीवार बनी हुई है। जो चीन की दीवार के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी दीवार है। यह इतनी चौड़ी है कि इस पर एक साथ चार घुड़सवार बराबर में चल सकते हैं। यह दीवार 36 किलोमीटर लंबी है। इसको द ग्रेट बॉल ऑफ इंडिया भी कहा जाता है।
इसके किले को अजयगढ़ दुर्ग भी कहा जाता है क्योंकि इस किले पर शत्रुओं द्वारा विजय प्राप्त करना बहुत ही मुश्किल कार्य था। इस किले को मेवाड़ की आंख भी कहते हैं। यह दुर्ग कई पहाड़ियों व घाटियों को मिलाकर बनाया गया है। पहाड़ियों में होने के कारण यह सबसे सुरक्षित किला माना जाता है। इस किले के अंदर प्रवेश करने के लिए 7 विशाल दरवाजा को पार करना पड़ता है। सबसे बड़ा दरवाजा रामपोल के नाम से जाना जाता है।
किले के मुख्य रास्ते पर हनुमान पोल के पास एक हनुमान मंदिर है। कुंभलगढ़ दुर्ग को देखने के साथ-साथ आपको एक और दुर्ग देखने को मिलता है। जिसको कटारगढ़ के नाम से जाना जाता है। साल 2013 में कुंभलगढ़ दुर्ग को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। कुल मिलाकर यह दुर्ग ऐतिहासिक विरासत की शान और शूरवीरों की तीर्थ स्थली रहा है।
3. जयपुर का जंतर मंतर
यह एक खगोलीय वैद्यशाला है। जिसका निर्माण सवाई जय सिंह ने करवाया था। सवाई जयसिंह खुद एक विद्वान व्यक्ति थे। इसलिए उन्होंने खगोलीय घटनाओं को समझने, समय मापने, ग्रहण की भविष्यवाणी करने, तारों की गति व स्थिति आदि कार्यों को जानने के लिए इस वैद्यशाला के अलावा दिल्ली, उज्जैन, बनारस, मथुरा में भी जंतर मंतर का निर्माण करवाया था। जिसमें केवल आज तक दिल्ली व जयपुर का जंतर मंतर सुरक्षित बना हुआ है। आज भी इनके यंत्रों का उपयोग समय नापने, कैलेंडर बनाने आदि कार्यों को सटीकता से जानने में प्रयोग किया जाता है। 1 अगस्त 2010 को इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था क्योंकि इसका खगोलीय यंत्र आज भी सुरक्षित है।
4. आमेर का किला
यह किला जयपुर से 11 किलोमीटर दूर आमेर क्षेत्र में है। यह दुर्ग यहां की सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह अपनी वस्तु कला और इतिहास की वजह से जाना जाता है। इतिहासकारों की मानें तो इस किले को आमेर नाम पास में स्थित भगवान शिव के एक मंदिर से मिला है। जिसका नाम अम्बकेश्वर मंदिर है। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इस किले को आमेर नाम मां दुर्गा के दूसरे रूप अंबिका से मिला है। यह कस्बा मूल रूप से स्थानीय मीणाओं द्वारा बसाया गया था। बाद में यहां राजा मानसिंह प्रथम ने राज किया और इस दुर्ग का निर्माण करवाया था।
यह दुर्ग लाल बलुआ पत्थरों एवं संगमरमर से बनाया गया है। जिसके अंदर की ओर जाने पर कई प्रकार के महल बने हुए हैं। जिसकी अपनी अलग विशेषताएं हैं। मुख्य रूप से इनमें दीवान-ऐ-आम, दीवान-ऐ-खास, सुख निवास, जय मंदिर अपनी अनूठी शैली से लोगों को आकर्षक लगते हैं। इसके अलावा शीश महल भी आमेर किले का सबसे प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। जो बहुत सारे कांचों से मिलाकर बनाया हुआ है। इस महल की विशेषता है कि यदि आप इसके कांचों पर थोड़ा सा प्रकाश डालते हैं तो यह रोशनी की तरह जगमगा उठता है। इसकी आकर्षक डिजाइन और भव्यता को देखते हुए इस किले को विश्व विरासत धरोहर में शामिल किया गया है
5. हवा महल
ऐसी वास्तुकला और संस्कृति का अद्भुत मिश्रण का प्रतीक आपको देश में कहीं देखने को नहीं मिलेगा। हवा महल की सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया में किसी भी नीम के बिना बनी सबसे ऊंची इमारत है। गुलाबी शहर जयपुर में हवा महल का निर्माण सन 1799 में महाराजा सवाई सिंह ने करवाया था।
हवा महल को बनाते समय वास्तुकला और डिजाइन का खास ख्याल रखा गया था। क्योंकि सवाई जयसिंह चाहते थे कि बाहर से देखने पर इसकी डिजाइन भगवान श्री कृष्ण की मुकुट के समान दिखें। इसे अंदर से इस प्रकार बनाया गया कि राजघराने की महिलाएं उसमें खड़ी होकर महल के नीचे सड़कों के समारोह व गलियारों में होने वाले रोजमर्रा की जिंदगियों को देख सके।
हवामहल पांच मंजिला इमारत से बना हुआ है। ऊपर से यह महज डेढ़ फुट चौड़ा है। इसमें कुल 953 छोटे-छोटे झरोखे हैं। ताकि, इन जालीदार झरोखों से हमेशा ठंडी हवा महल के अंदर आती रहे और भीषण गर्मी में भी यह ठंडा बना रहे। इस महल को पैलेस ऑफ विंड के नाम से भी जाना जाता है। सुबह की सुनहरी रोशनी में इसे दमकते हुए देखना एक अनोखा अहसास देता है।
6. जैसलमेर का सोनार किला
जब सूर्य की पहली किरण इस पर पड़ती है तो पूरा दुर्ग स्वर्णिम आभा बिखेरता है। इसलिए किले को सोनार किला या गोल्डन फोर्ट के नाम से जाना जाता है। यह किला राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध और दुनिया के सबसे बड़े दुर्गों में से एक माना जाता है। इस किले की खास बात यह है कि इस किले के अंदर ही जैसलमेर शहर की अधिकतर आबादी निवास करती है।
इस किले का निर्माण 1156 में रावल जैसल ने करवाया था। यह 250 फीट ऊंचा और विशाल खण्डों से निर्मित है। इसमें कुल 99 प्राचीन है। इस किले में इस्लामिक और राजपूताना वस्तुकला शैली का एक अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। सोनार किले का मुख्य आकर्षण महारावल पैलेस है। जो अपने संगमरमर के सिंहासन के लिए लोकप्रिय है
7. मेहरानगढ़
यह राजस्थान का सातवां और सबसे आखरी अजूबा है। मेहरानगढ़ का अर्थ सूर्य होता है। राठौडौ ने अपने मुख्य देवता सूर्य देव के नाम से इस किले का नाम मेहरानगढ़ रखा था। जोधपुर शहर जिसे सूर्य नगरी भी कहा जाता है। इसे देखने के लिए हजारों पर्यटक देश-विदेश से आते हैं। मेहरानगढ़ किले को जोधपुर शहर की शान कहां गया है। आप जोधपुर शहर के किसी कोने में खड़े होकर इस किले को देख सकते हैं।
इसका निर्माण 1459 में राव जोधा ने करवाया था। यह किला 120 मीटर ऊंची एक पहाड़ी पर बना हुआ है। कहा जा सकता है कि इसकी ऊंचाई दिल्ली की कुतुब मीनार से भी ऊंची है। इसकी दीवारें 10 किलोमीटर तक फैली हुई है। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार दरवाजे, जालीदार खिड़कियां है। किले की खास बात यह भी है कि आप इस किले की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंच कर भारत और पाकिस्तान सीमा को देख सकते हैं। इस किले में हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी की जा चुकी है। इसलिए यह वर्षभर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
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