Rajasthan Bhatner Fort: भारत में जब भी किलों के इतिहास की बात होती है, तो हर किले की अपनी अलग कहानी होती है। आज राजस्थान के ऐसे किले की कहानी बताएंगे, जिसमें एक मुस्लिम रानी ने जौहर किया था। इस किले को राजस्थान की उत्तरी सीमा का प्रहरी कहां जाता है। राजस्थान का भटनेर किला हनुमान जिले में स्थित है। यह किला घगेघर नदी के किनारे बना है। इस किले का निर्माण जैसलमेर की राजा भाटी के पुत्र भूपत ने करवाया था।
यह दुनिया के सबसे प्राचीनतम और महान दुर्ग में से एक है। इस दुर्ग को मुगल सम्राट अकबर और शूरवीर पृथ्वीराज चौहान जैसे राजाओं ने नियंत्रण में रखा था। इस किले पर बाकी किलों के मुकाबले सबसे अधिक बार आक्रमण हुए हैं, फिर भी यह आज उतनी ही शान से खड़ा है। इस किले को भारत का सबसे मजबूत किला होने की ख्याति प्राप्त है।
भटनेर से हनुमानगढ़ पड़ा था नाम
इस किले के अंदर एक भूमिगत सुरंग है, जो भटनेर से भटिंडा और हरियाणा के सिरसा तक जाती थी। यह दुर्ग चारों ओर मरुस्थल से गिरा होने के कारण इसे धानवाद किलो के श्रेणी में रखा गया है। इस दुर्ग का विशाल क्षेत्रफल 52 बीघा जमीन पर फैला हुआ है। जिसमें 52 विशाल बुर्ज बने है। इस किले का निर्माण पक्की ईंटों और चुने से हुआ है। 1805 ईस्वी में बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने भाटियों को हराकर इस किले पर अपना आधिपत्य कायम किया था।
जीत के इस दिन मंगलवार था, इस कारण हनुमान जी के नाम पर इस किले का नाम हनुमानगढ़ रखा गया। बीकानेर इस तरह भटनेर किले का नाम बदलकर हनुमानगढ़ रख दिया गया था। इस खुशी में इस किले के अंदर हनुमान मंदिर भी बनवाया गया था। इस किले को भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता था।
भटनेर किले का इतिहास
भटनेर किले का इतिहास काफी साल पुराना है । इस किले का सर्वाधिक महत्व इसलिए भी अधिक रहा था, क्योंकि यहां मध्य एशिया, सिंध, काबुल के व्यापारी भटनेर के मुल्तान कस्बे से होते हुए दिल्ली व आगरा जाते थे । इस किले ने इतिहास के कई युद्ध और योद्धा देखें हैं। क्योंकि पुराने दिनों में जो भी विदेशी आक्रमणकारी भारत पर आक्रमण करने या जितने आया, उन आक्रमणकारियों को सबसे पहले इस किले पर आक्रमण करना पड़ता था।
ऐसे सभी आक्रमणकारियों का सामना भटनेर दुर्ग से हुआ। यही कारण है कि जलालुद्दीन बुखारी के पुत्र कुतुबुद्दीन ऐबक, अकबर व तैमूर का आधिपत्य इस किले पर रहा था। तैमूर ने अपनी आत्मकथा में यह लिखा कि उसने ऐसा मजबूत किला पूरे हिंदुस्तान में कहीं नहीं देखा।
मुस्लिम महिलाओं ने भी किया था जौहर
सन 1398 में मुगल शासक तैमूर लंग ने भटनेर किले पर आक्रमण करके दुलचंद भाटी को हराकर दुर्ग पर अपना कब्जा कर लिया था। तैमूर को हराने के लिए भटनेर के भाटी शासक दूलचंद ने कड़ा प्रतिरोध किया था। इस युद्ध में राजपूत और मुसलमान ने तैमूर के खिलाफ एक साथ जंग लड़ी थी, लेकिन अंत में भटनेर किले पर तैमूर ने कब्जा कर लिया था। तैमूर के भयानक आक्रमण और कत्लेआम के कारण इस किले की हिंदू महिलाओं ने ही नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाओं ने भी जौहर कर लिया था।
यह किला बाहर से आने वाले आक्रमणकारियों के लिए दिल्ली जाने वाले रास्ते के बीच में पड़ता था। इस कारण किले पर सबसे ज्यादा बार हमले हुए। इस किले पर अकबर से लेकर पृथ्वीराज चौहान तक अनेक राजाओं ने शासन किया। 13वीं सदी में गुलाम वंश के शासक बलबन के चचेरे भाई शेर खां का भी यहां राज रहा था। शेर खां की कब्र आज भी इसी किले के अंदर बनी हुई है।
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