Opium Farming: अफीम फसलों के मूल्यांकन में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान के नारकोटिक्स विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। नारकोटिक्स विभाग ने झालावाड़ जिले के 2844 किसानों की अफीम की तुलाई के लिए गोविंद भवन में व्यवस्था कर दी है। वहां पर मौजूद किसानों के लिए छाया और पानी की पूर्ण व्यवस्था होगी।
तौल प्रकिया का आयोजन
यह तौल प्रकिया तहसील वार आधार पर निर्धारित की जाएगी। हर रोज केवल डेढ़ सौ किसानों की ही अफीम की तुलाई की जाएगी। इस तुलाई प्रक्रिया में अफीम की खेती की दो अलग-अलग विधियां शामिल होंगी। पहली है कट विधि और दूसरी है सीपीएस विधि। जिले के 1219 अफीम पट्टों ने कट विधि अपनाई है जबकि 1685 पट्टों ने सीपीएस विधि को चुना। चीरा विधि वाले अफीम का तौल गुरुवार से शुरू होगा और 6 अप्रैल तक जारी रहेगा। वही सीपीएस विधि वाले अफीम के लिए तौल 8 अप्रैल से शुरू होगा और 20 अप्रैल तक जारी रहेगा।
नारकोटिक्स विभाग की रहेगी पूरी नजर
निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए नारकोटिक्स विभाग ने तौल केंद्र को 12 सीसीटीवी कैमरा से सुरक्षित कर दिया है। नारकोटिक्स कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारी ग्वालियर और कोटा के स्थान से इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर सकते हैं। इसी के साथ बाहर से चार अधिकारियों सहित एक दर्जन कर्मचारियों की भी एक समर्पित टीम तैनात की गई है।
विभाग ने कोटा से दो बेलर मंगवा लिए हैं। इन बेलर का काम सीपीएस विधि के माध्यम से उत्पादित अफीम को फलियों के साथ संपीड़ित करके गांठों में बदलना है।
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