Banswara: राजस्थान के दक्षिण भाग में बसे बांसवाड़ा राज्य को सबसे अधिक वर्षा होने के कारण 'राजस्थान का चेरापूंजी' कहा जाता है. चाचाकोटा में महानदी के किनारे बिखरे टापू के कारण इसे "100 द्वीपों का शहर भी कहा जाता है।" बांसवाड़ा पर्यटकों को अपनी हरी भरी हरियाली और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की वजह से आकर्षित करता है।
बांसवाड़ा का इतिहास
बांसवाड़ा का नाम बांस के पेड़ों के कारण पड़ा है। यहां पर बांस के पेड़ काफी ज्यादा पनपते थे। इस राज्य पर महारावलों का शासन था। लोगों का कहना है कि इसका नाम बांसिया नामक एक वीर शासन के नाम पर रखा गया है जिसकी जगमाल सिंह के हाथों हार ने महारावलों के अधीन एक नए युग शुरुआत की थी।
बांसवाड़ा के आसपास देखने लायक जगह
चाचाकोटा: यहां से सिर्फ 14 किलोमीटर की दूरी पर आकर्षक चाचा कोटा है। यह माही बांध के बैक वाटर में बस एक प्राकृतिक स्थल है। यहां पर हरी भरी पहाड़ियां झरने और घुमावदार सड़के हैं। प्रकृति प्रेमियों को यह जगह स्वर्ग के जैसी लगेगी।
माही बांध: यहां से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित माही बजाज सागर बांध जिले के जीवन रेखा है। यह कृषि और आर्थिक विकास में महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है। यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। इसके बैक वाटर में डूबी पहाड़ियां छोटे-छोटे दीपों का एक अद्भुत नजर बनती है । इसी कारण बांसवाड़ा को "100 द्वीपों का शहर" का खिताब मिला है।
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर: 19 किलोमीटर की छोटी ड्राइव आपको पवित्र त्रिपुरा सुंदरी मंदिर तक ले जाएगी। यह मंदिर त्रिपुरा सुंदरी देवी या माता तीर्थया को समर्पित है। इस मंदिर की खास बात 18 भुजाओं से सुसज्जित भव्य मूर्ति है। 52 भैरव और 64 योगिनियों की छोटी मूर्तियां से घिरा यह मंदिर वागड़ क्षेत्र का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
कागदी पिकअप: बांसवाड़ा के पूर्व हिस्से में बसा यह शांत स्थान कागदी झील से गिरा हुआ है। झील प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती है। बरसात के मौसम में पक्षियों को देखने वालों के लिए यह पसंदीदा स्थान बन जाता है।