District Formation: राजस्थान में भजनलाल सरकार ने 9 जिले और 3 संभाग को खत्म कर दिया है, जिसका विपक्ष ने खूब विरोध भी किया। ये सभी जिले पूर्व की गहलोत सरकार ने बनाए थे। अब सवाल ये उठता था है कि क्या जिला बनाने और खत्म करना का अधिकार राज्य सरकार के पास है? यदि हां तो इसकी पूरी प्रक्रिया क्या है?
विपक्ष ने भजनलाल सरकार पर उठाया सवाल
दरअसल, विधानसभा के शून्य काल के दौरान कांग्रेस विधायक सुरेश मोदी और रामकेश मीणा ने भजनलाल सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार पक्षपात की नीति के तहत जिला खत्म कर रही है। उन्होंने सभी 9 जिलों को दोबारा से जिला बनाने की मांग की।
जिला बनाने और खत्म करने का अधिकार राज्य सरकार के पास
दरअसल, राजस्थान भू—राजस्व अधिनियम 1956 के सेक्शन 15 और 16 के अनुसार जिले बनाने या समाप्त करने का पूर्ण अधिकार राज्य सरकार के पास है। इसी को कोट करते हुए राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि प्रदेश के जिलों, क्षेत्रों, डिवीजन आदि के निर्माण, समाप्ति अथवा परिवर्तन करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। राज्य सरकार प्रदेश में नए जिले, उपखंड, तहसील, उप तहसील और गांवों का गठन/पुनर्गठन भी कर सकती है।
गहन अध्ययन के बाद बाद लिया गया निर्णय
मंत्री जोगाराम पटेल ने आगे कहा कि इस फैसले में किसी प्रकार का कोई राजनैतिक प्रभाव नहीं है। पूर्व में बनी परमेश चंद्र कमेटी के आधार पर व इसके अनुरूप ही वर्तमान कमेटी का निर्धारण किया गया है। राज्य सरकार ने पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और दूरगामी सोच के साथ ही नवीन जिलों में से 9 जिलों को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
इन नौ जिलों को किया गया खत्म
सरकार ने दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़, सांचौर जिलों को खत्म कर दिया है। बता दें पिछली गहलोत सरकार ने अपने कार्यकाल में 17 नए जिले बनाए थे।
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