Border security: भारत सरकार द्वारा भारतीय जवानों की सुविधा के लिए एक सड़क का निर्माण करवाया जा रहा है। राजस्थान से सटे हुए बॉर्डर से अब पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। इस सड़क को बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और श्रीगंगानगर में बॉर्डर पर जीरो फेंसिंग के पास बनाने की तैयारी चल रही है। इस सड़क के बनने से जवान बॉर्डर पर पैदल गश्त करने के साथ-साथ अब वहां से भी वाहन द्वारा गश्त कर पाएंगे, जिससे बॉर्डर पर हो रही गलत गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के आईजी एम. गर्ग ने बताया कि राजस्थान में लगभग हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़क का निर्माण किया जाएगा।
जीरो लाइन के नजदीक किया जाएगा सड़क निर्माण
बीएसएफ के आईजी एम.एल. गर्ग ने बताया कि केंद्र सरकार ने देश की सुरक्षा के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में 1096 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस सड़क की कुल लंबाई 1450 किलोमीटर होगी, जिसमें बाकी के लगभग 354 किलोमीटर सड़क का निर्माण अन्य क्षेत्रों में किया जाएगा। इस सड़क के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने लगभग साढ़े 4000 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। इस सड़क का निर्माण जीरो लाइन पर स्थित फेंसिंग के काफी नजदीक किया जाएगा।
2021 में मिली प्रोजेक्ट को मंजूरी
2021 में इस प्रोजेक्ट को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने तैयार किया था, जिसके पश्चात गृह मंत्रालय द्वारा इसे मंजूरी दी गई थी। इस कार्य के लगभग एक महीने में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इस काम की शुरुआत बाड़मेर से होगी और बाड़मेर से होते हुए जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर तक इसका निर्माण पूरा किया जाएगा। इस सड़क के बहुत जल्दी बनने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि पंजाब में इसका निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।
मिलेगा ये लाभ
बॉर्डर पर इस सड़क के बनने से भारतीय सेना को काफी लाभ मिलेगा। वर्तमान में बीएसएफ के सैनिक जो एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट के बीच में रेतीले धोरों के कारण कठिनाइयों का सामना करते हैं, उन्हें इस सड़क के बन जाने से राहत मिलेगी। अब पैदल गश्त के साथ-साथ जीप जैसे वाहनों से भी पेट्रोलिंग संभव हो सकेगी। जीरो लाइन पर स्थित एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट तक पहुंचने में समय भी काफी कम लगेगा। इसके अलावा, बॉर्डर के उस पार से भारतीय सीमा में फेंके जा रहे हीरोइन जैसे नशीले पदार्थों पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। नशे की तस्करी के लिए जमीन के अंदर बनाई जाने वाली सुरंगों का पता लगाना पाकिस्तान के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा। रेतीले धोरों में 24 घंटे गश्त करने वाले जवान अब और भी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभा पाएंगे।