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Camel Rescue Centre : राजस्थान में ऊंटों की सेवा और उनकी रक्षा के लिए 14 साल से कैमल रेस्क्यू सेंटर चल रहा है।

Camel Rescue Centre : मसीहा और मसीहाई का नाम आज के दौर में भी देखने को मिल जाता है। जबकि इन मसीहाईयों की कीमत कुछ नहीं होती, सिवाय इंसानियत के। आज के दौर में कल्पना से परे हो जाता है जब हम किसी के करुणा और प्रेम का प्रमाण यूं देते हैं कि वह बिना किसी देय के निस्वार्थ भाव से मानवता के कार्य का निर्वहन करते हुए खुद के प्रतिभा को दूसरों के लिए समर्पित कर देता है। इसी अमूल्य योगदान का प्रतीक है। राजस्थान में ऊंटों की सेवा और उनकी रक्षा के लिए 14 साल से कैमल रेस्क्यू सेंटर चल रहा है। जहां इनका इलाज निःशुल्क किया जाता है। ऊंटों को बचाने,इलाज और के लिए काम किया जा रहा है। अबतक 1.12 लाख ऊंटों का इलाज फ्री में किया गया है।

ऊंटों का सहारा बना मोबाइल क्लीनिक

इंग्लैंड से आए डॉ. एमा मोरिस अरब डॉ. रिचर्ड ने कैमल वेलफेयर प्रोजेक्ट की शुरुआत की। इसके तहत मोबाइल वैन की शुरुआत की गई। मोबाइल वैन प्रदेश के दूरस्थ इलाकों तक पहुंचती है।सीआरसी में जगह - जगह से रेस्क्यू किए गए ऊंटों का इलाज किया जाता है। 

हर साल हजारों ऊंटों का इलाज 

इस प्रोजेक्ट के तहत हर साल 3 से 5 हजार ऊंटों का मोबाइल क्लीनिक के जरिए फ्री इलाज किया जाता है। 17 हजार 471 ऊंटों का शिविर और 95 हजार 296 ऊंटों का मोबाइल क्लिनिक जरिए मुफ्त इलाज किया गया है। 

कठपुतली शो के जरिए जागरूक अभियान

डॉ अभिनव स्वामी कैमल वेलफेयर प्रोजेक्ट इंचार्ज ने बताया कि ऊंट गाड़ी में रात के समय रिलेक्टर लगाए जाते हैं ताकि दुर्घटना से बच सके। ऊंट गाड़ी पर हेल्पलाइन नंबर भी लगाए जाते हैं जिससे ऊंट का मालिक मोबाइल क्लिनिक और सेंटर से संपर्क कर सकें। इसके अलावा राज्य के गांवों और मेलो कठपुतली शो के जरिए लोगों को जागरूक करने का काम करते है

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