Cattle Breeders Of Kota: भारत को यूं ही कृषि प्रधान देश नहीं कहा जाता है। भारत की एक बहुत बड़ी आबादी है जिनकी निर्भरता पूरी तरह से खेती पर है। हमारे देश के अन्नदाता की भूमिका जीवन में बेहद खास है। जिस तरह से भारत में कृषि प्रधानता की अपनी बहुलता और प्राथमिकता रही है। उसी तरह से पूरे विश्व में भारत दुग्ध उत्पादन में भी पहले नंबर पर आता है। भारत का विश्व में दूध उत्पादन करने में दूसरे नंबर पर आने की प्राथमिकता की बात करें तो वह भारत के पशुपालक है। जो अपने जीवन का एक अहम हिस्सा का योगदान देकर एक बेहतर आहार की उत्पत्ति में अपना सहयोग देते हैं।
बात जब पशुपालन की होती है तो भारत के वह राज्य सबसे ज्यादा चर्चा में आते हैं, जहां की कृषि यानी की फसल उत्पादन में भी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। जी हां वह राज्य है हरियाणा और पंजाब इसके अलावे भी भारत के अन्य राज्य का कमोबेश पशुपालक और दुग्ध उत्पादन में अपना सहयोग देते हैं। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में राजस्थान के किसानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्तमान समय में जहां तकनीक की उत्पत्ति आए दिन प्रत्येक क्षेत्र में नए-नए टेक्नोलॉजी का उत्पादन कर रही है। इसके मध्य नजर कृषि और पशुपालन क्षेत्र भी वंचित नहीं है। अब राजस्थान की किसानों को शिक्षित करने के लिए कृषि विभाग किसानों के कुछ दलों को बनाई है। फिर उन्हें प्रशिक्षण के लिए हरियाणा के करनाल की कृषि विज्ञान केंद्र बेहतर पशुधन रखने के विचार को सीखने के लिए भेजा गया है।
करनाल में होगा प्रशिक्षण
बता दें की सहायक निदेशक राजवीर सिंह ने बताया कि क्लस्टर अप्रोच के तहत पूरे जिले भर के किसानों को एक समूह में हरियाणा के करनाल के कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा। वही यह प्रशिक्षण कार्य सात दिनों का है, और 10 मार्च को वहां से किसान प्रशिक्षण लेकर वापस आएंगे। वह बताते हैं कि इसके पीछे हमारी एक ही मंशा है की किसान आधुनिक तकनीक से रूबरू हो और अपना जीवन उन्नत करें।
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पशुधन के तरीके को सीखना उद्देश्य
साथ ही सहायक निदेशक नहीं यह भी कहा की हरियाणा के करनाल के कृषि विज्ञान केंद्र में राजस्थान किसानों को वहां भेजने का हमारा एक ही उद्देश्य है कि वह भ्रमण के साथ-साथ कृषि के नए तकनीक से भी रूबरू हो। उन तकनीकों का इस्तेमाल करके अपने क्षेत्र में भी फसल की उन्नत पैदावार को उगाने में सफल हो। साथ ही पशुधन को रखने की प्रक्रिया से भी रूबरू होकर उसमें बेहतर डेवलपमेंट ला सकते हैं। उन्होनें यह भी कहा कि किसानों को भेजने का उद्देश्य यह है कि भारत भर में बहुत विविधता है। इसके अलावा अलग-अलग तरह की कृषि जलवायु है। ऐसे में किसान अलग जगह की तकनीक को सीख कर अपने खेत मे लागू करे। एनडीआरआई करनाल नेशनल राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान केंद्र, जहां पर पशुधन को किस तरह से उन्नत तकनीकी के साथ रखा जाता है। इसे भी देखें सीखे और समझें यही हमारी कोशिश है।